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राजस्थान विधानसभा घेराव: कांग्रेसियों पर पुलिस ने भांजी लाठियां, कई कार्यकर्ता हुए घायल

जयपुर में विधानसभा घेराव के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच भारी झड़प हुई। 22 गोदाम पर जुटी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का प्रयोग किया, जिसमें कई कार्यकर्ता घायल हो गए।

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फोटो पत्रिका

Jaipur News: राजस्थान में एक बार फिर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के खेलकूद प्रकोष्ठ के सैकड़ों कार्यकर्ता जब विधानसभा घेराव करने निकले तो पुलिस ने उनका रास्ता रोक लिया। बात बढ़ने पर पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की हुई, बैरिकेड टूटे और आखिरकार पुलिस को वॉटर कैनन चलानी पड़ी।

पुलिस से हुई झड़प, 12 से ज्यादा घायल

22 गोदाम स्थित सहकार भवन से जैसे ही कांग्रेस कार्यकर्ता विधानसभा की ओर बढ़े, पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड हटाने की कोशिश की। दोनों पक्षों में तीखी नोक-झोंक हुई और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने वॉटर कैनन चला दी और भीड़ को तितर-बितर कर दिया।

खेलकूद प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अमीन पठान ने बताया कि इस झड़प में 12 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को चोटें आई हैं। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को बर्बरता करार देते हुए कहा कि "पुलिस गोलियां चलाए, तो भी हम युवाओं की आवाज उठाते रहेंगे।"

प्रदर्शन में शामिल हुए बड़े नेता

विधानसभा घेराव से पहले आयोजित सभा में मंच पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी पहुंचे। इस दौरान माहौल जोशीला था, डोटासरा ने मंच से गमछा लहराकर डांस किया और कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया। उन्होंने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार गोहत्या जैसे भावनात्मक मुद्दों की आड़ में जनता का असली समस्याओं से ध्यान भटका रही है।

डोटासरा ने कहा कि भाजपा को न गोमाता से मतलब है, न खिलाड़ियों से, उन्हें सिर्फ वोट बैंक की राजनीति करनी है। उन्होंने कांग्रेस के खेलकूद प्रकोष्ठ की तारीफ करते हुए कहा कि अमीन पठान के नेतृत्व में यह विंग सभी प्रकोष्ठों में नंबर-वन है।

आखिर क्यों हो रहा है यह प्रदर्शन?

अमीन पठान के मुताबिक, यह सिर्फ राजनीतिक प्रदर्शन नहीं है इसके पीछे कई ठोस मांगें हैं। भाजपा सरकार बनने के बाद से राजस्थान में खेल बजट में भारी कटौती की गई है। खिलाड़ियों को टीए-डीए, प्रोत्साहन राशि और छात्रवृत्ति समय पर नहीं मिल रही।

खेल के मैदानों पर अतिक्रमण हो रहा है और स्टेडियम निर्माण के काम ठप पड़े हैं। इन हालात में युवा खेल से दूर होकर नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने विधानसभा अध्यक्ष के नाम ज्ञापन सौंपकर सरकार से खेल विरोधी नीतियां खत्म करने, खिलाड़ियों को सुविधाएं देने और नौकरी सुनिश्चित करने की मांग की है।

आगे क्या?

अमीन पठान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द मांगें नहीं मानीं तो बड़ा आंदोलन होगा। युवाओं और खिलाड़ियों की यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई — यह तो बस शुरुआत है।