जयपुर

वो चेहरे जो टिकटों की दौड़ में नहीं रहकर चुनाव में पार्टी की जीत के लिए लगाते जी-जान

राजनीति में वो दौर अब बीते दिनों की बात हो चला है जब कार्यकर्ता विचारधारा से प्रभावित होकर राजनीतिक दलों का दामन थामा करते थे।
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Nov 03, 2018
elelction

जयपुर। राजनीति में वो दौर अब बीते दिनों की बात हो चला है जब कार्यकर्ता विचारधारा से प्रभावित होकर राजनीतिक दलों का दामन थामा करते थे। अब कार्यकर्ता-नेता किसी भी राजनीतिक दले से जुड़ते हैं तो चाह होती है बस एक अदद टिकट की। फिर चाहे वो टिकट लोकसभा चुनाव का हो या विधानसभा चुनाव अथवा स्थानीय निकाय चुनावों का।

टिकटों के मामले में स्थिति एक अनार-सौ बीमार वाली होने लगी है। यानी टिकट कम और दावेदार ज्यादा। इस दौर में भी राजनीतिक दलों के भीतर ऐसे नेता-कार्यकर्ता मौजूद हैं जिन्हें टिकट की चाहत नहीं होती। या यूं कहें कि चाहत होती भी है तो इसके लिए ज्यादा भागदौड़ नहीं करते। ऐसे नेताओं को चुनाव लडऩे में नहीं लड़ाने में मजा आता है। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों में मौजूद ऐसे ही नेताओं की पड़ताल की पत्रिका चुनाव डेस्क ने...

अजमेर
प्रखर वक्ता और भाजपा के रणनीतिकारों में है शुमार अजमेर जिले की राजनीति में लखावत को प्रखर वक्ता एवं रणनीतिकार के रूप में माना जाता है। जिला ही नहीं प्रदेश स्तर पर भी कोई वक्तव्य जारी करना हो तो लखावत इसमें अग्रणी रहे हैं। लखावत वर्ष 1970 से राजनीति में सक्रिय रहे हैं।

लखावत को भाजपा सरकार में दो बार राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रौन्नति प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया। इससे पहले वे 1994 में नगर सुधार न्यास अध्यक्ष रहे और 1997 में राज्यसभा पहुंचे। लखावत अजमेर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र की विधायक अनिता भदेल के राजनीतिक गुरु भी माने जाते हैं लेकिन उन्होंने कभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा।


बीकानेर
भाईजी की पर्ची के बिना आगे नहीं बढ़ सकते हैं
करीब 85 वर्षीय जर्नादन कल्ला पुष्करणा समाज के बड़े नेता हैं। पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला के बड़े भाई हैं।

कभी चुनाव नहीं लड़े पर बी.डी. कल्ला की राजनीति उन्हीं से शुरू होती है और उन पर ही खत्म हो जाती है। किसी भी काम के लिए लोग जब जर्नादन कल्ला के पास जाते हैं तो वे एक पर्ची बना कर देते हैं जिसे भाई जी की पर्ची कहा जाता है।


झालावाड़
चुनाव लडऩे की नहीं सोची, पर हर चुनाव में अहम रोल
राजनीति के माहिर सत्यनारायण गुप्ता ने कभी चुनाव लडऩे की नहीं सोची, लेकिन हर चुनाव में अहम रोल अदा करते हैं। गुप्ता कभी वार्ड मेंबर का चुनाव भी नहीं लड़े। लेकिन अनंग कुमार के मित्र रहे है, इसलिए राजनीति से शुरू से ही नाता रहा है।

गुप्ता ने अनंग कुमार जैन, वसुंधरा राजे के लोकसभा व विधानसभा चुनाव में काफी कार्य किया। इसी की बदौलत इन्हें 2008 के कार्यकाल में वसुंधरा ने जनअभाव अभियोग निराकरण समिति का अध्यक्ष बनाया। अनिल जैन को भी दो बार खानपुर विधानसभा से चुनाव लड़ाया है। लेकिन किसी कारणवश पिछले चुनाव से ही राजनीति से दूरी बनाए हुए है।


झालावाड़
पार्टी जिलाध्यक्ष रहे लेकिन कभी टिकट नहीं मांगा
कांग्रेस पार्टी में 1980 से सक्रिय रघुराजसिंह हाड़ा भी पार्टी के लिए लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। छह साल तक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष का पद भी संभाल चुके हैं। राघुराज सिंह हाड़ा ने कभी अपने लिए टिकट नहीं मांगा।

लेकिन जुझारसिंह, बृजराजसिंह, ज्वाला प्रसाद, मोहनलाल राठौर, मीनाक्षी चन्द्रावत, संजय गुर्जर और रमा पायलट सहित कई लोगों को चुनाव लड़ाए है। इन नेताओं के चुनाव संचालन में हाड़ा अब तक अहम भूमिका निभाते रहे हैं। हाड़ा बताते है कि हमेशा पार्टी के लिए काम करते रहे हैं, अगर अभी भी पार्टी टिकट देती है, तो चुनाव के लिए तैयार है।


झालावाड़
वसुंधरा समेत कई नेताओं के चुनाव में किया काम
जिले में एक बार स्वतंत्र पार्टी से विधायक का चुनाव लड़े, लेकिन हार का सामना करना पड़ा था।

श्रीकृष्ण पाटीदार ने दोबारा कभी चुनाव नहीं लड़ा। पाटीदार जिले से जिला प्रमुख सहित भाजपा के करीब 10 साल से अधिक समय तक जिलाध्यक्ष भी रहे हैं, लेकिन उसके बाद कभी टिकट नहीं मांगा और पार्टी के लिए काम किया, वसुन्धरा राजे सहित कई प्रमुख लोगों के चुनाव के दौरान में पार्टी के लिए काम किया। इसी की बदौलत राज्य सरकार में उन्हें जन अभाव अभियोग निराकरण समिति का अध्यक्ष बनाया गया।

घनश्याम गुर्जर, कांग्रेस, झालावाड़
गुर्जर झिकडिया के सरपंच रहे, कांग्रेस के महासचिव भी रहे, अभी जिला उपाध्यक्ष है। सेठ सुजानसिंह गुर्जर, रमा पायलट, संजय गुर्जर सहित चारों विधान सभाओं में कांग्रेस के कई प्रत्याशियों को वे चुनाव लड़वा चुके हैं। चुनाव क्यों नहीं लड़ा पूछने पर कहते हैं यह पार्टी के ऊपर है। हम तो मन से काम करते आ रहे हैं।


दामोदर बंग, भाजपा, जोधपुर
पूर्व यूआईटी चेयरमैन रहे हैं। लोकतंत्र रक्षा मंच के संरक्षक है। लगभग पचास साल का अनुभव है इनको भी राजनीति का। संघ और भाजपा के पक्ष में विधानसभा और लोकसभा के चुनावों में पिछले काफी समय से काम कर रहे हैं। कई चुनावों में रणनीति बनाते रहे हैं लेकिन चुनावी रण में कभी खुद नहीं उतरे।


चित्तौडग़ढ़
पिछले चार दशक से अधिक समय से कांग्रेस संगठन में रहकर विधानसभा चुनाव में सक्रिय भूमिका निभाते आए है। पिछले तीन वर्ष से अधिक समय से कांग्रेस जिलाध्यक्ष धाकड़ लंबे समय से चित्तौडगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाने में मुख्य भूमिका निभाते आए हैं।

वे जिला परिषद, पंचायत समिति के सदस्य तो रहे लेकिन कभी विधानसभा स्तर का चुनाव नहीं लड़ा। हमेशा संगठन को प्राथमिकता देते आए धाकड़ की पहचान चुनाव लडऩे की बजाय लड़ाने वालों के रूप में रही।

अमर सिंह चूंडावत, कांग्रेस
पूर्व जिला अध्यक्ष चूंडावत भीम-देवगढ़ क्षेत्र में प्रत्याशियों को हर चुनाव लड़ाते रहे, लेकिन खुद कभी नहीं लड़े।

गुणसागर कर्णावट, कांग्रेस
कर्णावट ने भी 1967 से अब तक कई चुनाव लड़वाए। दावेदारों में भी शामिल रहे, लेकिन कभी मौका नहीं मिला।

मदनलाल बापरोत, भाजपा
आपातकाल के पहले तक बापरोत काफी सक्रिय रहे थे। राजसमंद में भाजपा संगठन को खड़ा करने में बड़ा योगदान रहा।


जिले में भाजपा के मुख्य रणनीतिकार रहे हैं
पेशे से चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट सेठिया तीन दशक से चित्तौडग़ढ़ जिले में भाजपा के मुख्य रणनीतिकार माने जाते है। वे वर्ष 1990 से हर विधानसभा व लोकसभा चुनाव में चुनाव संचालक या कोर कमेटी सदस्य रहकर चुनाव लड़ाने का काम करते आए है।

करीब 59 वर्षीय सेठिया वर्ष 1993 एवं 1998 में विधानसभा चुनाव एवं वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में नामांकन पत्र भी भर चुके लेकिन हर बार पार्टी का आदेश होने पर नामांकन वापस लेते रहे। जनप्रतिनिधि के रूप में किसी पद पर नहीं रहे।

Published on:
03 Nov 2018 08:00 am