जयपुर

वोटों का गणित: कुल मतदाताओं का बहुमत हासिल किए बिना ही बन जाते हैं एमएलए-एमपी

लोकतंत्र का सामान्य मतलब होता है बहुमत का शासन होता है। बहुमत यानी अगर कुल 100 मतदाता है तो जिसको 51 लोग पसंद करे वो चुना जाए।
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Oct 30, 2018
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प्रकाश कुमावत/जयपुर। लोकतंत्र का सामान्य मतलब होता है बहुमत का शासन होता है। बहुमत यानी अगर कुल 100 मतदाता है तो जिसको 51 लोग पसंद करे वो चुना जाए। लेकिन हमारे देश में जिस तरह के प्रावधान हैं, उनके चलते मतदान करने वालों में से जितने लोग चुनाव मैदान में खड़े हैं उनमें से सबसे ज्यादा वोट हासिल करने वाला विजेता होता है। इसके चलते कई सांसद और विधायक ऐसे होते हैं जिन्हें उनके इलाके के कुल मतदाताओं में से 30 फीसदी से भी कम मतदाताओं के वोट मिलते हैं।

राजस्थान पत्रिका ने पिछले विधानसभा चुनावों में निर्वाचित विधायकों को मिले मत प्रतिशत का विश्लेषण किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। राज्य की मौजूदा सरकार में चार तो मंत्री ऐसे हैं, जिन्हें विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र पर कुल वोटों के 30 फीसदी से भी कम वोट मिले। इनमें राजपाल सिंह शेखावत, बाबूलाल वर्मा, कृष्णेन्द्र कौर दीपा, जसवंत सिंह यादव शामिल है।

इसी तरह 30 से 35 फीसदी वोट पाने वालों में युनूस खान, सुरेन्द्र गोयल, हेमसिंह भड़ाना, पूष्पेन्द्र सिंह, सुशील कटारा, कमसा है। पूर्व राजपरिवार से राजनीति में आई दीयाकुमारी को वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में सवाई माधोपुर सीट से कुल मतदाताओं के महज 28.66 फीसदी वोट मिले थे।

किस दिग्गज को मिले कितने वोट
वसुंधरा को 49.97 फीसदी
वर्ष 2013 के विस चुनाव में झालरापाटन से वसुंधरा राजे 49.95 फीसदी वोट मिले थे और वो मुख्यमंत्री बनी। पूर्व सीएम अशोक गहलोत को सरदारपुरा सीट पर कुल मतदाताओं में से 38.66 फीसदी ने वोट दिया। 2008 का चुनाव जीत गहलोत जब सीएम बने तब वे अपने कुल मतदाताओं के 43.21 फीसदी वोट ही पा सके थे।

पूर्व विस अध्यक्ष
वर्ष 2008 विधानसभा चुनाव में श्रीमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र से दीपेन्द्र सिंह शेखावत कुल वोटों में से 36.41 फीसदी वोट मिले। लेकिन वर्ष 2013 के चुनाव में वे हार गए, उन्हें कुल मतों के 31.03 फीसदी मत मिले। मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने 45.65 फीसदी वोट लिए थे।

नेता प्रतिपक्ष
निवर्तमान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी को वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में बीकानेर जिले की नोखा सीट से महज 34.87 मत मिले। ठीक इसी तरह वर्ष 2008 के विस चुनाव में वसुंधरा राजे झालरापाटन से कुल मतदाताओं के 40.68 फीसदी वोट लेकर जीती और विधानसभा मेे नेता प्रतिपक्ष बनी।

पूर्व भाजपाध्यक्ष
भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रहे अशोक परनामी को वर्ष 2013 के चुनाव में आदर्श नगर विधानसभा सीट से 34.64 फीसदी वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष चंद्रभान मंडावा विधानसभा सीट से चुनाव लड़े तो वे अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। वे मात्र 8.27 फीसदी वोट ही पा सके। अपनी जमानत भी नहीं बचा सके।

विस उपाध्यक्ष
वर्ष 2013 के विस चुनाव में अपनी सीट पर कुल पड़े मतों के 32.14 फीसदी वोट लेकर राव राजेन्द्र सिंह जीते और उसके बाद विधानसभा उपाध्यक्ष बने। वर्ष 2008 में बनी कांग्रेस सरकार के समय विस उपाध्यक्ष रहे रामनारायण मीणा ने विधानसभा चुनाव में कुल पड़े वोटों के 25.85 फीसदी मत हासिल किए थे।

मोदी लहर में नहीं आए सेकंड डिविजन
वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में चली मोदी लहर में भी भाजपा के दिग्गज मंत्री भी 40 फीसदी वोट भी नहीं बटोर सके। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया 38.73, प्रभुलाल सैनी 39.12, अजयसिंह किलक 38.36, डॉ रामप्रताप 38.81, श्रीचंद कृपलानी 38.95, वासुदेव देवनानी 38.37, अनिता भदेल 39.34, सुरेन्द्र पाल टीटी 36.44, कमसा 37.02 वोट ले सके।


कांग्रेस सरकार: 35 फीसदी से कम वोट वाले मंत्री
वर्ष 2008 में बनी अशोक गहलोत सरकार में मंत्री रहे दुर्रु मियां को विधानसभा चुनाव में अपनी सीट पर कुल वोटों में से मा.भंवरलाल को 33.50, ब्रिजेन्द्र सिंह ओला 34.85 तथा राजकुमार शर्मा 26.52 फीसदी वोट हासिल करके जीते और सरकार में मंत्री की कुर्सी तक पाए। इसी सरकार में मंत्री रही राजपा की गोलमा 34.55 वोट मिले थे। जबकि ज्यादातर मंत्री व विधायक ऐसे थे जिन्होंने 35 फीसदी वोट लिए थे।

सर्वाधिक वोट हासिल करने वाले 5 नेता
वसुंधरा सरकार (वर्ष 2013 से 2018)
वसुंधरा राजे-----------49.97%
कालीचरण सराफ-------45.47%
राजेन्द्र राठौड़----------43.69%
राजकुमार रिणवा------- 42.30%
गजेंद्र सिंह खींवसर-------41.30%

गहलोत सरकार (वर्ष 2008 से 2013)
अशोक गहलोत-------43.21%
महेन्द्रजीत सिंह-------46.84%
शीशराम ओला-------34.85%
भरतसिंह-------31.37%
बृजकिशोर शर्मा-------30.34%

Published on:
30 Oct 2018 07:40 am