
Ayurveda Plants: जयपुर. डॉ. वासुदेव देवनानी की एक और अभिनव पहल के तहत राजस्थान विधानसभा परिसर में नक्षत्र वाटिका और हर्बल वाटिका का निर्माण किया जा रहा है। यह पहल भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, ज्योतिष, आयुर्वेद और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगी। इन दोनों वाटिकाओं का उद्घाटन 5 मई को प्रातः 10 बजे पांच राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों की उपस्थिति में किया जाएगा।
डॉ. देवनानी ने बताया कि नक्षत्र वाटिका भारतीय ज्योतिष के 27 नक्षत्रों पर आधारित होगी। विधानसभा के दक्षिणी भाग में लगभग 5000 वर्ग मीटर क्षेत्र में अर्धचंद्राकार उद्यान के रूप में इसे विकसित किया जा रहा है। इसमें प्रत्येक नक्षत्र से संबंधित विशेष वृक्ष लगाए जाएंगे, जिनका संबंध नौ ग्रहों, बारह राशियों और त्रिदेव—ब्रह्मा, विष्णु और शिव—से माना जाता है। यह वाटिका न केवल आध्यात्मिक महत्व रखेगी, बल्कि लोगों को अपने नक्षत्र से जुड़े वृक्षों के प्रति जागरूक भी करेगी।
वहीं, विधानसभा के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में लगभग 850 वर्ग मीटर में हर्बल वाटिका विकसित की जा रही है। इसमें 38 क्यारियों में 38 प्रकार के औषधीय पौधे लगाए जाएंगे, जिनमें तुलसी, अश्वगंधा, एलोवेरा, ब्राह्मी, लेमनग्रास और सर्पगंधा जैसे महत्वपूर्ण पौधे शामिल हैं। प्रत्येक क्यारी में 20 से 25 पौधों का रोपण किया जा रहा है, जिससे यह क्षेत्र औषधीय दृष्टि से समृद्ध बनेगा।
डॉ. देवनानी के अनुसार, ये वाटिकाएं केवल उद्यान नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का जीवंत प्रतीक होंगी। यह पहल पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सकारात्मक वातावरण निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही, आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति, ज्योतिष और प्रकृति के गहरे संबंध से परिचित कराने का एक प्रेरणादायक माध्यम भी बनेगी।
यह पहल वास्तव में सराहनीय और प्रेरणादायक है। नक्षत्र वाटिका और हर्बल वाटिका का निर्माण न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, ज्योतिष और आयुर्वेद को भी बढ़ावा देता है। आज के समय में जब लोग प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं, ऐसी पहल उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करेगी। खासकर युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के लिए यह ज्ञानवर्धक और जागरूकता बढ़ाने वाला कदम साबित होगा। यदि इस तरह की पहल अन्य सरकारी संस्थानों में भी लागू हो, तो इसका व्यापक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है।