Web Series Lovers : वेब सीरीज की बढ़ती लोकप्रियता यंगस्टर्स के लिए समस्या बन रही है। सावधान। वेब सीरीज के दीवाने हो रहे इस खतरनाक बीमारी के शिकार। रोजाना 10 से 15 केस डाक्टरों के पास पहुंच रहे है। डाक्टर भी हैरान हो गए है। बचने के लिए बताएं ये रास्ते।
बदलते दौर में इंटरनेट कइयों के लिए मुसीबत बनता नजर आ रहा है। लगातार मोबाइल का उपयोग, गेम खेलना, वेबसीरीज देखना उनकी सेहत के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। वेबसीरीज की बढ़ती लोकप्रियता युवाओं की सेहत के लिए समस्या बन रही है, वे वन सिटिंग में ही पूरे एपिसोड देख रहे हैं। आमतौर पर इसे डिजिटल ड्रग की लत या बिंज वॉचिंग कहा जाता है। यह व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से रोगी बना देती है, जो आगे चलकर साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर का रूप ले लेती है। जयपुर के मनोचिकित्सक के पास पहले वेबसीरीज एडिक्शन के एक-दो केस आते थे, लेकिन अब 10 से 15 केस रोजाना आ रहे हैं, जिसमें 10 से 25 वर्ष तक के युवा शामिल हैं।
मानसरोवर निवासी 16 वर्षीय एक किशोर पढ़ाई का बहाना कर बंद कमरे में कई घंटों तक वेब सीरीज देखता रहता था। ऐसा वो लगातार करने लगा। धीरे-धीरे वह पैरेंट्स से झगड़ा करने लगा। जब वह कमरे में रहता तो खुश रहता था। घर से बाहर निकलने पर उसे बीमार जैसा महसूस होने लगा। समस्या दिनों-दिन बढ़ने पर पैरेंट्स ने डॉक्टर को दिखाया। अभी इलाज चल रहा है।
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सोडाला निवासी 28 वर्षीय एक युवती लगातार 6 से 7 घंटे तक मोबाइल पर सीरियल ड्रामा देखती थी, जिससे लगातार उसके सिर में दर्द रहने लगा। साथ ही व्यवहार में भी परिवर्तन आने लगा। जब भी उसे गुस्सा आता, तो फोन चलाने लगती है। ऐसे में वो घर से दूर होने लगी। अभी वे डॉक्टर की सलाह से इलाज ले रही है।
वेबसीरीज देखने का समय तय करें।
वेबसीरीज की जगह, खुद का ध्यान दूसरी जगह डायवर्ट करें।
फैमिली के साथ समय व्यतीत करें।
किताबें और अखबार पढ़ें।
फोन का उपयोग कम करें।
मनोचिकित्सक डॉ. रोमा चेलानी ने बताया कि लंबे समय तक वेब सीरीज देखने से नींद की समस्या, साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर, अवसाद, व्यवहार में बदलाव समेत कई शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं। लगातार वेब सीरीज देखने से शरीर में झनझनाहट व बेवजह दर्द शुरू हो जाता है। उन्होंने बताया कि एक-दो घंटे से ज्यादा समय तक वेबसीरीज नहीं देखनी चाहिए। लोग सब काम छोड़कर सिर्फ मोबाइल या अन्य डिस्प्ले डिवाइस में लगे रहते हैं। परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
इसमें लोगों को लगता है कि उन्हें शारीरिक समस्याएं हो रही है, लेकिन वास्तविकता में वे किसी भी शारीरिक रोग से पीड़ित नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति को साइकोसोमेटिक डिसऑर्डर कहा जाता है।
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