भाजपा हर हाल में विधानसभा चुनाव जीतकर एक बार फिर से सत्ता बरकरार रखना चाहती है। इसके लिए वह कोई भी कड़ा कदम उठाने से नहीं चूकेगी।
जयपुर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) हर हाल में विधानसभा चुनाव जीतकर एक बार फिर से सत्ता बरकरार रखना चाहती है। इसके लिए वह कोई भी कड़ा कदम उठाने से नहीं चूकेगी।
राजस्थान के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो देखा गया है कि जिस सत्ताधारी पार्टी ने मौजूदा विधायकों को दोबारा चुनाव लड़ाया है उनमें से ज्यादातर की हार हुई है।
2008 में भाजपा ने 68 उम्मीदवारों को टिकट दिए थे, जिन्होंने साल 2003 का विधानसभा चुनाव लड़ा था। उनमें से केवल 28 ही जीते पाए और बाकी के 40 एमएलए चुनाव हार गए। 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का भी कुछ ऐसा ही हाल रहा।
इसी कारण सत्ता विरोधी लहर ने भाजपा को नई रणनीति बनाने के लिए मजबूर कर दिया है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा के मौजूदा विधायकों में से करीब 80 विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं।
कहा जा रहा है कि भाजपा युवाओं को मौका दे सकती है, जिससे की लंबे समय से पार्टी की सेवा कर रहे लोगों को मौका मिले और लोगों में अच्छा संदेश जाएं।
उपचुनाव में जीत के बाद नए जोश से भरपूर कांग्रेस को चुनावों में पूरी जीत की उम्मीद है और वह पूरे जोर शोर के साथ तैयारी में लगी हुई है। वहीं, वसुंधरा राजे के सामने सरकार को बचाए रखने की बेहद कड़ी चुनौती है। आपको बता दें कि राजस्थान 7 दिसंबर को मतदान होगा। मतगणना 11 दिसंबर को होगी।