
जयपुर। राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र से पहले राज्य सरकार बजट तैयार करने की अंतिम कवायद में जुटी है। विधानसभा के 28 जनवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में 11 फरवरी को बजट पेश किया जाएगा। इस बीच ‘पत्रिका’ ने राजस्थान के जिलों से जुड़ी प्रमुख जरूरतों, उनकी वर्षों पुरानी मांगों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन सुझावों को एक मंच पर लाकर सरकार के सामने रखा है।
यदि इन मांगों को बजट में शामिल किया जाता है, तो न केवल क्षेत्रीय असंतुलन कम होगा, बल्कि लाखों लोगों को सीधी राहत मिलेगी। पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, सिंचाई, उद्योग और बुनियादी ढांचे से जुड़ी ये अपेक्षाएं बजट से जनआकांक्षाओं की असली तस्वीर पेश करती है।
-पर्यटन और हेरिटेज संरक्षण
सुझाव: झीलों की नगरी और हेरिटेज सिटी उदयपुर की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर निर्भर है। झीलों की सफाई, घाटों का विकास और ऐतिहासिक इमारतों के संरक्षण के लिए बजट में विशेष पैकेज दिया जाए।
-औद्योगिक कॉरिडोर और रोजगार
सुझाव: आदिवासी अंचल से गुजरात पलायन रोकने के लिए एमएसएमई, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल और हैंडीक्राफ्ट आधारित उद्योग स्थापित किए जाएं।
-मेडिकल कॉलेज
सुझाव: उदयपुर मेडिकल कॉलेज की दूरी करीब 65 किमी है। राजसमंद में मेडिकल कॉलेज खुलने से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार होगा।
-एलिवेटेड रोड
सुझाव: एलिवेटेड रोड बनने से यातायात दबाव कम होगा और पर्यटकों व श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी।
-मेडिकल कॉलेज
सुझाव: आदिवासी और दूरस्थ जिले में मेडिकल कॉलेज खुलने से गंभीर मरीजों को उदयपुर रेफर करने की मजबूरी खत्म होगी, मातृ-शिशु मृत्यु दर घटेगी।
-कृषि विश्वविद्यालय
सुझाव: कृषि विश्वविद्यालय से शोध, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक किसानों तक पहुंचेगी। किसानों को उन्नत बीज, जैविक खेती, जल संरक्षण आदि की जानकारी मिलेगी।
-उदयपुर तक फोरलेन सड़क
सुझाव: 165 किमी लंबी जर्जर सड़क के स्थान पर फोरलेन बनने से आवागमन, पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। फोरलेन रोड बनने से उदयपुर और बांसवाड़ा के साथ-साथ डूंगरपुर जिले के लोगों को भी फायदा होगा।
-कृषि महाविद्यालय व मक्का प्रोसेसिंग
सुझाव: मक्का आधारित प्रोसेसिंग यूनिट से किसानों को बाजार मिलेगा। यहां मक्के का आटा, भुट्टे की रोटी, कॉर्नफ्लेक्स, पॉपकॉर्न, स्वीट कॉर्न आदि लघु उद्योग लग सकते हैं।
-माही नदी का पानी पूरे जिले तक
सुझाव: नहरी तंत्र विकसित कर माही का पानी पूरे जिले तक पहुंचाया जाए। माही का पानी गुजरात तक जा रहा हैं, लेकिन नजदीकी जिले में पूरा उपयोग नहीं हो पाया है।
औद्योगिक इकाइयों की स्थापना
सुझाव: लघु व मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन देकर पलायन रोका जा सकता है। औद्योगिक एवं लघु उद्योगों के प्रोत्साहन से युवाओं को राहत मिल सकती है।
-प्रदूषण मुक्त जोजरी
सुझाव: जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्लांट इंडस्ट्री में लगें, ताकि एक भी बूंद गंदा पानी जोजरी में नहीं जाए। इससे जोजरी सहित आस-पास का क्षेत्र भी प्रदूषण मुक्त होगा।
-ड्रेनेज मास्टर प्लान
सुझाव: 257 करोड़ के ड्रेनेज मास्टर प्लान को मंजूरी देकर शहर को जलभराव से राहत दी जा सकती है। इस बजट में राशि मिले तो शहर का ड्रेनेज सिस्टम सुधर सकता है।
-मेडिकल कॉलेज
सुझाव: चार जिलों के केंद्र फलोदी में मेडिकल कॉलेज खोलकर दुर्घटनाओं में जान बचाई जा सकेगी। यहां रामदेवरा का बड़ा मेला भरता है।
-उच्च व रोजगारपरक शिक्षा
सुझाव: तकनीकी, कृषि, नर्सिंग और कौशल विकास संस्थान खुलने से क्षेत्र आर्थिक हब बन सकता है।
-मेडिकल कॉलेज
सुझाव: 300 बेड का उन्नत जिला अस्पताल पहले से मौजूद है, मेडिकल कॉलेज से कार्डियक जैसी सुविधाएं मिलेंगी। अभी इन मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है।
-मिनी सचिवालय
सुझाव: मिनी सचिवालय के लिए जमीन आवंटित हो गई, लेकिन अब बजट की दरकार है। सभी सरकारी कार्यालय एक परिसर में संचालित हो सकेंगे।
-हर खेत को नहर का पानी
सुझाव: यमुना लिंक परियोजना के तहत नहरी पानी उपलब्ध कराने से मरुस्थलीय खेती को संजीवनी मिलेगी।
-रेल व सड़क
सुझाव: तारानगर, सालासर रेल कनेक्टिविटी, रिंग रोड और एलिवेटेड रोड से विकास को गति मिलेगी। रेल को लेकर लंबे समय से मांग है।
-ईसरदा बांध का पानी सिंचाई के लिए
सुझाव: बनेठा क्षेत्र में बने ईसरदा बांध का पानी टोंक को भी दिए जाने से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
-इंजीनियरिंग कॉलेज
सुझाव: जिले में उपलब्ध भवनों में कॉलेज शुरू कर स्थानीय छात्रों को बाहर जाने से रोका जा सकता है।
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