राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र इन दिनों अपने चरम पर है, लेकिन मंगलवार को सदन के भीतर जो हुआ उसने लोकतांत्रिक गरिमा और व्यक्तिगत भावनाओं के बीच की लकीर को बेहद बारीक कर दिया। भाजपा विधायक डॉ. गोपाल शर्मा ने विपक्ष के आरोपों के बाद जिस तरह सदन में अपना आपा खोया और बाद में वीडियो जारी कर 'खेद' प्रकट किया, उसने पूरे राजस्थान की राजनीति में हलचल मचा दी है।
राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में मंगलवार को एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। गौवंश के मुद्दे पर मचे बवाल के बीच जब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सिविल लाइन्स विधायक डॉ. गोपाल शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए, तो सदन एक रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। विधायक गोपाल शर्मा इतने आहत हुए कि उन्होंने सदन के पटल पर ही इस्तीफे की घोषणा कर दी और विपक्ष की ओर दौड़ पड़े। अब इस पूरे मामले पर डॉ. शर्मा ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
डॉ. गोपाल शर्मा ने अपने वीडियो संदेश की शुरुआत 'भारत माता की जय' और 'जय श्री राम' के साथ की। उन्होंने अपनी पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा, 'मैं बचपन से हिंदुत्व के विचारों में पला-बढ़ा हूँ। मेरे लिए गौ, गायत्री, गीता और धरती माता केवल शब्द नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं।'
उन्होंने बताया कि जब नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने उन पर 'घिनौने' आरोप लगाए, तो वे स्वयं पर नियंत्रण नहीं रख पाए। उनके अनुसार, उन पर लगाए गए आरोप उनकी वर्षों की तपस्या और निष्ठा पर प्रहार थे।
विधायक डॉ. गोपाल शर्मा ने सदन के भीतर हुए हंगामे और विपक्ष की बेंचों की तरफ जाने के अपने व्यवहार पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उन्होंने कहा कि आवेश में आकर मैं सदन की मर्यादा भूल बैठा। एक जनप्रतिनिधि के रूप में मुझे संयम बरतना चाहिए था, जिसका मुझे आजीवन खेद रहेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी प्रतिक्रिया केवल उन आरोपों के विरुद्ध एक 'स्वाभाविक मानवीय संवेदना' थी, जिन्हें वे कभी स्वीकार नहीं कर सकते।
सदन में चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने जयपुर में बछड़े का कटा सिर मिलने के मामले में कथित तौर पर विधायक के संरक्षण की बात कही थी। इससे आक्रोशित होकर डॉ. शर्मा ने कहा था, 'अगर इस मामले में मेरा कोई भी आदमी शामिल पाया गया, तो मैं सदस्यता से इस्तीफा दे दूँगा।' वीडियो में उन्होंने दोहराया कि वे आज भी अपनी बात पर कायम हैं, क्योंकि उनकी निष्ठा पूरी तरह साफ है।
डॉ. शर्मा ने अंत में संकल्प लिया कि वे अंतिम सांस तक भारत माता और सनातन मूल्यों के लिए समर्पित रहेंगे।