राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में 'राशन कार्ड और ई-केवाईसी' के मुद्दे पर सदन की कार्यवाही गरमा गई। परबतसर विधायक रामनिवास गावड़िया और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा के बीच हुई तीखी नोकझोंक ने चुनावी माहौल जैसा तनाव पैदा कर दिया।
राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान राशन कार्ड की ई-केवाईसी (e-KYC) में आ रही तकनीकी खामियों का मुद्दा गूँजा। परबतसर से कांग्रेस विधायक रामनिवास गावड़िया ने सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि केवाईसी की जटिलताओं के कारण प्रदेश के हजारों गरीब परिवारों का राशन बंद हो गया है।
जवाब में मंत्री सुमित गोदारा के 'विदेश' वाले बयान ने सदन में आग में घी डालने का काम किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर बहस हुई।
विधायक रामनिवास गावड़िया ने एक बेहद गंभीर तकनीकी खामी की ओर सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा 4 वर्ष 1 महीने का होता है, तो राशन कार्ड के रिकॉर्ड में विभाग उसे 5 वर्ष का दिखाता है। नियमानुसार 5 साल से पहले आधार कार्ड अपडेट नहीं होता। आधार और राशन कार्ड के डेटा में अंतर होने की वजह से बच्चे की ई-केवाईसी संभव नहीं हो पा रही है। एक सदस्य (बच्चे) की केवाईसी न होने के कारण पूरे परिवार का राशन वितरण रोक दिया गया है। गावड़िया के अनुसार, हर डीलर के पास ऐसे 50-60 परिवार परेशान हैं।
खाद्य मंत्री सुमित गोदारा ने बचाव करते हुए कहा कि राज्य में अब तक 75 लाख नए नाम जोड़े गए हैं, जो पिछली सरकार में नहीं हो रहा था। उन्होंने कहा कि 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए विशेष शिथिलता दी जा रही है।
लेकिन विवाद तब बढ़ा जब उन्होंने प्रवासियों पर टिप्पणी की, और कहा कि जो लोग विदेश में रोजगार के लिए गए हैं, क्या हम उन्हें भी गेहूं दें? जो विदेश में बैठकर कमा रहे हैं, क्या आप चाहते हैं कि वो भी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का लाभ उठाएं? यह योजना गरीबों के लिए है, समर्थ लोगों के लिए नहीं।
मंत्री के इस बयान पर विधायक रामनिवास गावड़िया बिफर पड़े। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि मंत्री को अपनी भाषा पर संयम रखना चाहिए। गावड़िया ने कहा कि गांव का किसान और गरीब का बेटा ही दूसरे राज्यों या खाड़ी देशों (विदेश) में मजदूरी करने जाता है। वे वहां 'मौज' करने नहीं, बल्कि अपने परिवार का पेट पालने के लिए जाते हैं।
उन्होंने स्थानीय मुहावरे का प्रयोग करते हुए कहा कि क्या विदेश जाने वाले सब 'अड़ेली मांडिया' (अमीर/रसूखदार) हैं? उन्हें राशन से वंचित करना सरासर अन्याय है।
राजस्थान में राशन कार्ड धारकों के लिए ई-केवाईसी की अंतिम तिथि नजदीक आ रही है। अंगूठे के निशान (Biometric) न मिलने और मोबाइल नंबर लिंक न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी आबादी राशन से वंचित हो रही है। विपक्ष की मांग है कि जो लोग मजदूरी के लिए बाहर हैं, उनके लिए 'वन नेशन वन राशन कार्ड' (ONORC) के तहत सत्यापन की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाए ताकि उनके पीछे रह गए परिवार को परेशानी न हो।