
निकाय चुनाव में मतदान खत्म होते ही भाजपा और कांग्रेस की असली सियासी रणनीति शुरू होगी। दोनों दलों ने संभावित जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए पार्षदों को एकजुट रखने की तैयारी की है। भाजपा बहुमत के आंकड़े के आसपास रहने वाले निकायों में प्रत्याशियों को होटल-रिसॉर्ट में ठहराकर ‘प्रशिक्षण वर्ग’ के नाम पर साथ रखने की रणनीति बना रही है। कांग्रेस ने भी कांटे के मुकाबले वाले निकायों में मतदान के तुरंत बाद या मतगणना से पहले बाड़ेबंदी की तैयारी की है। दोनों दलों की नजर मजबूत निर्दलीयों पर भी है, क्योंकि अध्यक्ष-सभापति के चुनाव में उनका समर्थन निर्णायक हो सकता है। बोर्ड गठन की यह सियासी बाजी 21 सितम्बर तक चलेगी।
निकाय चुनाव में मतदान खत्म होते ही भाजपा की बोर्ड गठन को लेकर सियासी कवायद तेज होगी। पार्टी की नजर खासतौर पर उन निकायों पर रहेगी, जहां वह बहुमत के आंकड़े के आसपास रह सकती है। ऐसे निकायों में मतदान के बाद प्रत्याशियों को होटल या रिसॉर्ट में एक साथ रखने की तैयारी है। पार्टी ने इस कवायद को ‘प्रशिक्षण वर्ग’ नाम दिया है।
हालांकि, स्पष्ट बहुमत वाले निकायों में ऐसी जरूरत नहीं होने पर फैसला स्थानीय समीकरणों के आधार पर होगा। संगठन ने इसकी जिम्मेदारी संबंधित जिलाध्यक्षों और निकाय प्रभारियों को दी है। महापौर-सभापति का चुनाव 20 और उपमहापौर-उपसभापति का चुनाव 21 सितम्बर को होना है।
ऐसे में भाजपा की रणनीति परिणाम से लेकर बोर्ड गठन तक अपने पार्षदों को एकजुट रखने की है। पार्टी को आशंका है कि परिणाम के बाद जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग के जरिए पार्षदों को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है।
भाजपा ने मजबूत निर्दलीय और बागी प्रत्याशियों पर भी नजर रखी है। जिन निकायों में बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों का समर्थन जरूरी होगा, वहां स्थानीय नेताओं को उनसे संपर्क साधने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
प्रदेश के 169 नगरीय निकायों में पहले चरण का मतदान खत्म होते ही कांग्रेस अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने की कवायद शुरू करेगी। पार्टी ने जिला व विधानसभा प्रभारियों, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को अलर्ट करते हुए प्रत्याशियों के साथ पार्टी विचारधारा से जुड़े मजबूत निर्दलीयों से भी संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। खासतौर पर उन निकायों पर नजर है, जहां अध्यक्ष पद का मुकाबला कांटे का रहने और निर्दलीयों की भूमिका निर्णायक होने की संभावना है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, स्थानीय समीकरणों के आधार पर बाड़ेबंदी का समय तय होगा। जहां जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग की आशंका ज्यादा है, वहां प्रत्याशियों को मतदान के तत्काल बाद सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाएगा। अन्य निकायों में मतगणना से एक-दो दिन पहले बाड़ेबंदी की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर कुछ पार्षदों को राजस्थान से बाहर भी ले जाया जा सकता है।
कांग्रेस ने इसके लिए होटल-रिसॉर्ट समेत ठिकाने चिह्नित कर लिए हैं। कई जगह बुकिंग भी हो चुकी है। पार्टी की रणनीति नतीजे के बाद अध्यक्ष के लिए होने वाली जोड़-तोड़ को रोकना और अपने पार्षदों को एकजुट रखना है।