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जयपुर।
भारतीय जनता पार्टी से शुरू हुआ चाय पर चर्चा अभियान अब लगता है कांग्रेस पार्टी को भी रास आने लगा है। राजस्थान कांग्रेस की ओर भी कुछ इसी तरह का अभियान शुरू हुआ है, जिसे नाम मिला है 'चाय पर जनचर्चा'। कांग्रेस की 'चाय पर जनचर्चा' का मकसद है प्रदेश की वसुंधरा राजे सरकार की नाकामियों को आम जान तक पहुंचाना। गुरुवार को इस अभियान की शुरुआत जयपुर से हुई। कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता एवं जयपुर जिलाध्यक्ष प्रतापसिंह खाचरियावास की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ता चाय की थड़ी पर बैठे और आमजन को मौजूदा सरकार की जनविरोधी नीतियों के बारे में अवगत करवाया।
खाचरियावास ने कहा कि राजस्थान सरकार के भ्रष्टाचार, घमण्ड, तानाशाही, अन्याय और कुशासन के विरोध में जयपुर की चाय की दुकानों और थडियों पर भाजपा कुशासन का अन्त करने के लिए चाय पर जनचर्चा शुरू की है। चाय पर जनचर्चा के दौरान जयपुर की सभी चाय की दुकानों और थडियों पर कांग्रेस कार्यकर्ता लोगों को भाजपा सरकार द्वारा जनता के साथ किये गए धोखे से अवगत करायेंगें और लोगों से कांग्रेस को समर्थन की अपील करेगें।
खाचरियावास ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस बार प्रचार सामग्री के आधार पर चुनाव नहीं लड़कर मुददों के आधार पर चुनाव लडेगी। इस वक्त राजस्थान का कर्मचारी, व्यापारी, मजदूर, किसान और विद्यार्थी सरकार के धोखे, जुल्म और भ्रष्टाचार से परेशान है। प्रदेश में व्यापारियों और किसानों को जिस तरह से ठगा गया, वो सबके सामने हैं। हालात इतने खराब हैं कि पूरे देश में फव्वारा सिस्टम, स्प्रिंकलर और पाईप पर 12 प्रतिशत जीएसटी है जबकि राजस्थान में 18 प्रतिशत जीएसटी वसूल की जा रही है। चीनी पर मण्डी टैक्स वसूला जा रहा है, राशन का गेंहू मिलता नहीं है और प्रदेश के सभी मंत्री और विभाग भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी इन सब मुददों के आधार पर चाय पर जनचर्चा के तहत लोगों से भाजपा सरकार को विदा कर कांग्रेस सरकार बनाने की अपील करेगें।
ऐसे शुरू हुई थी चाय पर चर्चा
'चाय पर चर्चा' की शुरुआत साल 2014 में भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने शुरू की थी। इस अभियान का मकसद पार्टी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार मोदी के संदेश को जनता तक पहुंचाना था। दरअसल, इससे पहले कांग्रेस पार्टी की सालाना बैठक में मणिशंकर अय्यर ने मोदी पर तंज कसते हुए उन्हें 'चाय वाला' सम्बोधित किया था। बस यही व्यंग बीजेपी के कैंपेन बन गया। इसके बाद से चाय पर चर्चा की शुरुआत हो गई। तब नरेंद्र मोदी ने यहां तक कह दिया कि दिल्ली का शासक वर्ग एक चायवाले से डरा हुआ है।