जयपुर

‘CM बोले- आप कहाँ की विधायक हो?’, मंडावा विधायक रीटा चौधरी का छलका दर्द, सुनाया ये किस्सा

राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र में शनिवार को मंडावा से कांग्रेस विधायक रीटा चौधरी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और सरकार की कार्यप्रणाली पर सीधे प्रहार किए। राजस्व विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान रीटा चौधरी ने न केवल मुख्यमंत्री की 'सुलभता' के दावों की पोल खोली, बल्कि यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री उन्हें पहचान तक नहीं पाए।
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Updated: 21 Feb 2026, 4:07 PM IST
rita choudhary

राजस्थान विधानसभा में शनिवार को राजस्व विभाग की अनुदान मांगों पर बहस के दौरान मंडावा विधायक रीटा चौधरी ने सरकार को जमकर घेरा। रीटा चौधरी ने सदन के पटल पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उस दावे को चुनौती दी, जिसमें सीएम ने कहा था कि वे विपक्ष के विधायकों के फोन तुरंत उठाते हैं और उनसे मिलते हैं। चौधरी ने एक पुराना वाकया साझा करते हुए कहा कि जब वे मुख्यमंत्री से मिलने सीएमओ (CMO) गईं, तो सदन के नेता को यह तक नहीं पता था कि उनके सामने बैठी महिला कहाँ की विधायक है।

'मुख्यमंत्री मुझे पहचान नहीं पाए': रीटा चौधरी का गंभीर आरोप

सदन में अपनी बात रखते हुए रीटा चौधरी ने बताया, "जब भजनलाल जी नए मुख्यमंत्री बने थे, तब मैंने बजट के संदर्भ में उनसे मिलने के लिए फोन किया। उन्होंने मुझे 1 बजे सीएमओ बुलाया। जब मैं वहाँ पहुँची, तो मुख्यमंत्री ने मुझसे पूछा कि आप कहाँ से एमएलए हो? यह सुनकर मैं दंग रह गई। जिस मुख्यमंत्री ने मुझे खुद समय दिया, उन्हें यह नहीं पता कि उनके सामने खड़ा व्यक्ति कौन और कहाँ का विधायक है।"

'विपक्ष को तवज्जो नहीं, RSS को प्राथमिकता'

रीटा चौधरी ने मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के कामकाज के तरीके पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब वे मिलने गईं, तो वहाँ जोगाराम पटेल, देवी सिंह और नोक्षमा चौधरी जैसे सत्ता पक्ष के विधायकों के साथ-साथ आरएसएस (RSS) के कई लोग मौजूद थे और गीता उपदेश पर चर्चा चल रही थी।

  • विपक्ष की अनदेखी: चौधरी ने आरोप लगाया कि सीएम ने सबसे पहले आरएसएस के लोगों को बुलाया, फिर अपने मंत्रियों और विधायकों को, और सबसे अंत में उन्हें (विपक्ष की विधायक) समय दिया।
  • पिछली सरकार से तुलना: उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले की सरकार में मुख्यमंत्री सबसे पहले विपक्ष के विधायक को बुलाते थे और उनकी बात सुनते थे।

प्रभारी मंत्री और अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

मंडावा विधायक ने केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि प्रभारी मंत्री और स्थानीय प्रशासन को भी कटघरे में खड़ा किया।

  • फोन नहीं उठाते मंत्री: रीटा चौधरी ने कहा, "मैंने अपने प्रभारी मंत्री को कई बार फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। मंडावा में हवेलियों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं, कलेक्टर बेईमानी कर रहा है, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है।"
  • जनहित के मुद्दे: उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने निजी काम के लिए नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री और मंत्रियों से मिलना चाह रही थीं, लेकिन उन्हें रिस्पॉन्स नहीं मिला।

Video में देखें पूरा घटनाक्रम

कौन हैं कांग्रेस एमएलए रीटा चौधरी?

राजनीतिक विरासत: रीटा चौधरी राजस्थान कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दिवंगत रामनारायण चौधरी की पुत्री हैं। राजनीति उन्हें विरासत में मिली है।

मंडावा की 'शेरनी': उन्हें झुंझुनूं जिले की मंडावा विधानसभा सीट का पर्याय माना जाता है। उन्होंने इस क्षेत्र में अपने पिता की राजनीतिक विरासत को बखूबी संभाला है।

तीन बार की विधायक: रीटा चौधरी मंडावा से तीसरी बार विधायक चुनी गई हैं। उन्होंने 2008 में पहली बार जीत दर्ज की, फिर 2019 के उपचुनाव और अब 2023 के विधानसभा चुनाव में भी जीत हासिल की।

उपचुनाव में ऐतिहासिक जीत: 2019 में जब तत्कालीन विधायक नरेंद्र कुमार सांसद बन गए, तब हुए उपचुनाव में रीटा चौधरी ने भाजपा के सुशीला सीगड़ा को भारी मतों से हराकर कांग्रेस की झोली में यह सीट डाली थी।

जाट राजनीति का बड़ा चेहरा: शेखावाटी बेल्ट में जाट समुदाय के बीच उनकी गहरी पैठ है। वे किसान हितों के मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखती हैं।

बेबाक और निडर: विधानसभा के भीतर वे अक्सर अपनी ही सरकार (जब कांग्रेस सत्ता में थी) या वर्तमान भाजपा सरकार को घेरने से नहीं चूकतीं।

हवेलियों और पर्यटन का मुद्दा: मंडावा अपनी ऐतिहासिक हवेलियों के लिए प्रसिद्ध है। रीटा चौधरी अक्सर इन हवेलियों के संरक्षण और वहां होने वाले अवैध कब्जों के खिलाफ आवाज उठाती रहती हैं।

संगठन में पकड़: वे राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (RPCC) में महत्वपूर्ण पदों पर रही हैं और झुंझुनूं जिले की राजनीति में उनकी सहमति के बिना बड़े फैसले नहीं होते।

महिला सशक्तिकरण: ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की शिक्षा और उनके अधिकारों के लिए वे लगातार सक्रिय रहती हैं। मंडावा क्षेत्र में उनके समर्थकों की एक बड़ी फौज है जो उन्हें 'रीटा दीदी' कहकर संबोधित करती है।

विपक्ष में मजबूत भूमिका: वर्तमान भाजपा सरकार के दौरान वे सदन में राजस्व, शिक्षा और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सरकार को तथ्यात्मक रूप से घेरने के लिए जानी जाती हैं।

Updated on:
21 Feb 2026, 4:07 PM IST
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