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हवा में घुल रहा ‘जहर’, ‘खड्ढों’ में भर दिए 344 करोड़

गिर्राज शर्माजयपुर. वायु प्रदूषण रोकने के लिए राजधानी में 344 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर दिए, इसके बाद भी शहर की आबोहवा लोगों की सेहत के लिए खतरा बनी हुई है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनकैप) में मिले बजट से शहर में गड्ढे भरने और सड़कें बनाने में खर्च कर दिए, जबकि वायु गुणवत्ता […]

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जयपुर

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Girraj Prasad Sharma

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Girraj Prasad Sharma

Feb 21, 2026

गिर्राज शर्मा
जयपुर.
वायु प्रदूषण रोकने के लिए राजधानी में 344 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर दिए, इसके बाद भी शहर की आबोहवा लोगों की सेहत के लिए खतरा बनी हुई है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनकैप) में मिले बजट से शहर में गड्ढे भरने और सड़कें बनाने में खर्च कर दिए, जबकि वायु गुणवत्ता सुधरने के बजाय उसमें धूल के कण और ज्यादा घुल रहे हैं। हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) तय मान से चार से पांच गुना ज्यादा है।

शहर में वायु प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर पीएम-2.5 व पीएम-10 का स्तर 300 से 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच रहा है, जो केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तय मानकों 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से 3 से 5 गुना अधिक है। हवा सांस लेने लायक भी नहीं है। इससे फेफड़ों में 'जहर' पहुंच रहा है।

केन्द्र सरकार ने 15वें वित्त आयोग के तहत नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनकैप) में जयपुर नगर निगम को 344.70 करोड़ रुपए दिए। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, एनकैप का जो बजट मिला, वह पूरा खर्च हो गया है। निगम ने सड़क निर्माण व गड्ढे भरने में ही इस बजट को अधिक खर्च किया। जबकि वायु प्रदूषण रोकने के कारगर उपाय नहीं कर पाए, जो मशीनें खरीदी भी गई, उनका भी पूरी तरह उपयोग नहीं हो पाया।

यूं मिला एनकैप में बजट

वर्ष — राशि (करोड़ रुपए में)
2019-20 — 6
2020-21 — 165
2021-22 — 90.35
2022-23 — 64.05
2023-24 — 18.85

यूं खर्च किया एनकैप का बजट

वर्ष — राशि (करोड़ रुपए में)
2020-21 — 2.3
2021-22 — 7.87
2022-23 — 143.85
2023-24 — 155.99
2024-25 — 34.69

किस काम में खर्च किए 344.70 करोड़

मद — खर्च (करोड़ रुपए में)
सड़क निर्माण व पेचवर्क - 290.48
पैदल यात्री अवसंरचना का निर्माण - 3.80
ग्रीन स्पेस का विकास - 30.7
रोड स्वीपिंग मशीनों की खरीद - 1.6
एंटी स्मॉग गन से पानी का छिड़काव - 0.84
जन जागरूकता गतिविधियां - 1.12
कचरा कम्पोस्टर (श्रेडर मशीन) की खरीद - 3.37
ठोस कचरा संग्रहण के लिए वाहनों की खरीद - 6.41
लाल डूंगरी में ट्रांसफर स्टेशन के लिए दीवार निर्माण - 0.38
अन्य काम - 6

नहीं मिला बजट

वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं होने से जयपुर नगर निगम को वर्ष 2025-26 में एनकैप का बजट नहीं मिल पाया है।

सालाना औषत से पीएम 10 ढाई गुना ज्यादा

हवा में पीएम 10 का स्तर सालाना औषत से ढाई गुना ज्यादा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्धारित मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है, जबकि पिछले तीन सालों में जयपुर में पीएम 10 का स्तर 140 से 150 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा।

यूं बढ़ता गया पीएम 10 स्तर (माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर)

किस वर्ष कितना रहा औसत पीएम 10 स्तर
वर्ष - पीएम 10
2019-20 - 124
2020-21 - 112
2021-22 - 126
2022-23 - 143
2023-24 - 148
2024-25 - 143

पीएम-2.5 व पीएम-10 का 24 घंटे का औषत स्तर (माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) 7 फरवरी

क्षेत्र - पीएम-2.5 — पीएम-10 का स्तर

मानसरोवर - 357 - 500

सीतापुरा - 389 - 463

एमआइ रोड - 309 - 251

15 फरवरी को स्तर

मानसरोवर - 316 - 466

सीतापुरा - 382 - 410

एमआइ रोड - 259 - 225

आदर्श नगर - 288 - 175

जेडीए और निगम जिम्मेदार

शहर में प्रदूषण बढ़ने के लिए सड़कों पर उड़ रही धूल मुख्य कारण है। इसके लिए जेडीए और नगर निगम जिम्मेदार है। प्रदूषण कम करने के लिए हम भी नियमानुसार कार्रवाई कर रहे हैं।
- कपिल चंद्रावल, सदस्य सचिव, प्रदूषण नियंत्रण मंडल

प्रदूषण बढ़ने से हवा में माइक्रो अल्ट्रा फाइंड पार्टिकल की मात्रा भी बढ़ जाती है, जो फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। इससे हृदयघात व कैंसर जैसी बीमारियां होने की आशंका बनी रहती है। पीएम 10 का स्तर बढ़ना चिंताजनक है।
- डॉ. वीरेन्द्र सिंह, अस्थमा रोग विशेषज्ञ