MLA Vidyadhar Singh: प्रदेश में पिछले दिनों सियासी दबंगई के दो मामले सामने आए। पहला राजसमंद के भीम क्षेत्र का है, जहां विधायक पुत्र ने गरीबों के मकान रात के अंधेरे में तुड़वा दिए। वहीं, दूसरा मामला किशनगढ़-रेनवाल का है। जहां विधायक ने एसएचओ की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
MLA Vidyadhar Singh and Female SHO Controversy: किशनगढ़ रेनवाल (जयपुर): किशनगढ़-रेनवाल कस्बे के रीको औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक ऑयल मिल संचालक द्वारा किसानों की करीब तीन करोड़ रुपए की उपज लेकर फरार होने के मामले को लेकर चल रहे धरने के दौरान माहौल गरमा गया।
मामला सोमवार का है, जब धरना स्थल पर किसानों की समस्याओं को लेकर पहुंचे विधायक विद्याधर सिंह ने पुलिस की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। विधायक ने रेनवाल थाना प्रभारी नरेश कंवर को चेतावनी देते हुए कहा, आप इस वहम में मत रहना कि इंचार्ज हो। जब तक हम अपनी सीमा में रहते हैं, तब तक आप अफसर हैं। हम अपनी सीमा को लांघ देंगे तो क्या कर लोगे? आप 2 केस लगा दोगे, कितने केस लगा दोगे?
विधायक ने तेज आवाज में सवाल उठाए तो एसएचओ ने कहा, आप अनावश्यक बोल रहे हैं। इस पर विधायक ने कहा, मैंने आपसे कौन-सी गाली-गलौज की है? जिसके घर में हादसा होता है, उसमें जोश आएगा। आपके साथ ऐसा होगा तो आप भी ऐसा ही करेंगे?
विधायक ने कहा, हम आइजी, डीआइजी और एसीपी पर भी विश्वास नहीं करते। आप सरकारी नौकर हो। नौकरी के पैसे हम किसान देते हैं। आप अफसर नहीं, पब्लिक सर्वेट नौकर कहलाता है।
राजस्थान के राजसमंद जिले के भीम क्षेत्र में दबंगई का मामला सामने आया है, जिसमें भाजपा विधायक हरि सिंह रावत के पुत्र रणजीत सिंह पर गंभीर आरोप लगे हैं।
पीड़ितों के अनुसार, 8 मार्च की देर रात जेसीबी मशीन से तीन गरीब परिवारों के पक्के मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। नर्बदा देवी, गीता देवी और रघुवीर सिंह ने भीम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। उनका कहना है कि मकान वैध पट्टों पर बने हुए थे और वर्षों से वे वहीं रह रहे थे।
आरोप है कि आरोपी लंबे समय से मकान कम कीमत पर बेचने का दबाव बना रहा था और मना करने पर आधी रात को कार्रवाई करवा दी गई। इतना ही नहीं, मकान गिराने के बाद मलबा भी ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर हटाया गया, ताकि सबूत मिटाए जा सकें।
पीड़ितों ने यह भी बताया कि पहले भी धमकियां दी गई थीं, लेकिन राजनीतिक प्रभाव के चलते कार्रवाई नहीं हुई। मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ितों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।