जयपुर

500 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, राजस्थान साइबर क्राइम टीम ने मुख्य सरगना को किया गिरफ्तार

राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर देशव्यापी ठगी करने वाले एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस टीम ने इस 500 करोड़ रुपए के साइबर घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड को महाराष्ट्र के पुणे शहर से गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है।
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Jul 05, 2026
Rajasthan cyber fraud
फोटो पत्रिका नेटवर्क

जयपुर। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर देशव्यापी ठगी करने वाले एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस टीम ने इस 500 करोड़ रुपए के साइबर घोटाले के मुख्य मास्टरमाइंड को महाराष्ट्र के पुणे शहर से गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। जांच में गिरोह के कई और सदस्यों के नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

एडीजी (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि परिवादी सेंधाराम चौधरी ने 16 लाख रुपए की साइबर धोखाधड़ी की एक शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया था कि उसे 105 इंडियन स्टॉक्स एडवांस नाम के एक ऑनलाइन व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया था, जहां निवेश और ट्रेडिंग के माध्यम से अत्यधिक मुनाफा कमाने का लालच और झूठा आश्वासन देकर उसके साथ ठगी की गई। जब पुलिस की तकनीकी टीम ने उक्त व्हाट्सएप ग्रुप की चैट और डेटा का गहन विश्लेषण किया, तो खुलासा हुआ कि इस अकेले ग्रुप के जरिए देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों से करीब 500 करोड़ रुपए की साइबर ठगी को अंजाम दिया जा चुका है। जांच के आधार पर पुलिस ने युवराज सतीश मुदलियार (35) निवासी लोहगांव पुणे सिटी (महाराष्ट्र) को पुणे से गिरफ्तार कर लिया, जिसे जयपुर लाकर पूछताछ की जा रही है।

ऐसे देते है करोड़ों की ठगी को अंजाम

गिरोह पहले सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से लोगों को मोटा मुनाफा कमाने के मैसेज भेजते थे। शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए वे निवेश के बदले मुनाफे की मामूली मुनाफा पीड़ित के बैंक खाते में ट्रांसफर भी करते थे। इसके बाद जब पीड़ित बड़ी रकम निवेश कर देते, तो उन्हें ग्रुप से हटाकर संपर्क तोड़ दिया जाता और पूरी राशि हड़प ली जाती थी। इस खुलासे के बाद देश के विभिन्न हिस्सों से और भी शिकायतें सामने आने की संभावना है।

फर्जी फाइनेंस कंपनियों ने बनाया बैंक खातों का नेटवर्क

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने सनसनीखेज खुलासे किए हैं। उसने बताया कि वह पुणे में ग्रेस फाइनेंस, पॉजिटिव बैलेंस और गुरु फाइनेंस नाम से लोन देने वाली फर्जी कंपनियां चलाता था। इन कंपनियों के जरिए आम लोगों के दस्तावेज लेकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे। खाताधारकों को एटीएम कार्ड, चेकबुक और पासबुक के बदले प्रत्येक खाते के लिए दस हजार रुपए दिए जाते थे। साइबर ठगी से अर्जित रकम इन्हीं खातों में मंगाई जाती थी, जिसे बाद में एटीएम से निकाल लिया जाता था। इस रकम को हवाला और यूएसडीटी खरीद-बिक्री के माध्यम से विदेश भेजा जाता था। शर्मा इस पूरे नेटवर्क के संचालन के बदले पांच प्रतिशत कमीशन प्राप्त करता था।

विशेष टीम की रही अहम भूमिका

इस कार्रवाई को स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के थानाधिकारी एवं उप अधीक्षक पुलिस गजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने अंजाम दिया। टीम में पुलिस निरीक्षक हरिराम, उप निरीक्षक अजय कुमार, कांस्टेबल भींवाराम, सुभाष चाहर तथा चालक कांस्टेबल सुबेसिंह की विशेष भूमिका रही। पुलिस अब आरोपी के बिनांस वॉलेट और बैंक खातों को फ्रीज करवाकर गिरोह से जुड़े अन्य गुर्गों की तलाश में जुटी है।

Updated on:
05 Jul 2026 06:40 pm
Published on:
05 Jul 2026 06:40 pm