
जयपुर। राजस्थान में जमीन और मकान खरीदना अब पहले से ज्यादा महंगा हो गया है। राज्य सरकार ने नई डीएलसी (डिस्ट्रिक्ट लेवल कमेटी) दरें लागू कर दी हैं, जिसके बाद प्रदेशभर में जमीनों की सरकारी कीमतों में 5 से 49 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। राजधानी जयपुर में कई प्रमुख आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों में डीएलसी दरों में बड़ा इजाफा किया गया है। सबसे अधिक 49 प्रतिशत बढ़ोतरी जमना विहार न्यू में दर्ज की गई है, जबकि बापू बाजार प्रदेश का सबसे महंगा कारोबारी क्षेत्र बन गया है।
राज्य सरकार ने जिलों से प्राप्त प्रस्तावों और बाजार दरों के अध्ययन के बाद नई डीएलसी दरें लागू कर दी हैं। इससे जमीन और भवन की रजिस्ट्री का खर्च बढ़ेगा, क्योंकि स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क डीएलसी दरों के आधार पर तय किए जाते हैं। नई दरें 3 अगस्त 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो चुकी हैं। इससे पहले अप्रैल 2026 में भी सरकार ने डीएलसी दरों में 10 प्रतिशत की वृद्धि की थी। चार महीने के भीतर यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है।
नई दरों के बाद जयपुर का बापू बाजार प्रदेश का सबसे महंगा व्यावसायिक इलाका बन गया है। यहां 40 से 60 फीट चौड़ी सड़क पर स्थित व्यावसायिक भूमि की डीएलसी दर बढ़कर 5.71 लाख रुपए प्रति वर्गमीटर हो गई है। वहीं एमआई रोड पर सरकारी दर 3.97 लाख रुपए प्रति वर्गमीटर तक पहुंच गई है। इसके अलावा एयरपोर्ट रोड और सी-स्कीम जैसी प्रमुख लोकेशन भी महंगी श्रेणी में शामिल हो गई हैं।
जयपुर के कई आवासीय क्षेत्रों में इस बार उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। जमना विहार न्यू में डीएलसी दरों में सबसे अधिक 49 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वहीं नंदपुरी, जगतपुरा और जेएलएन मार्ग जैसे तेजी से विकसित हो रहे इलाकों में करीब 48 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार का तर्क है कि इन क्षेत्रों में बाजार मूल्य पहले से काफी अधिक था, जबकि सरकारी दरें अपेक्षाकृत कम थीं। इसी अंतर को कम करने के लिए संशोधन किया गया है।
राजधानी से जुड़े सैटेलाइट टाउन भी नई डीएलसी दरों से अछूते नहीं रहे। चौमूं, चाकसू, कालवाड़, जोबनेर, बगरू, बस्सी, फागी, बिचून और दूदू जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक जमीनों की सरकारी कीमतों में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है। कई स्थानों पर व्यावसायिक डीएलसी दरें अब 30 हजार से 50 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर तक पहुंच गई हैं। चौमूं के आदित्य नगर और अनाज मंडी क्षेत्र में भी नई दरों के बाद जमीन की सरकारी कीमतों में उल्लेखनीय इजाफा दर्ज किया गया है।
डीएलसी रेट वह न्यूनतम सरकारी मूल्य होता है, जिसके आधार पर किसी जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री की जाती है। इससे कम कीमत पर रजिस्ट्री नहीं हो सकती। स्टांप ड्यूटी, पंजीयन शुल्क और कई सरकारी प्रक्रियाएं इसी दर पर आधारित होती हैं। भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों को मिलने वाले मुआवजे के निर्धारण में भी डीएलसी दर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नई दरें लागू होने के बाद अब संपत्ति खरीदने वालों को पहले की तुलना में अधिक खर्च उठाना पड़ेगा।