
Ex-Minister Mahesh Joshi Chargesheet: राजस्थान में जल जीवन मिशन में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी ने विशेष अदालत (मामलात क्रम-2) में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी और उनके सहयोगी संजय बडाया के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दिया है। विशेष लोक अभियोजक मंजुला जैन के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ पेश की गई यह चार्जशीट करीब तीन हजार पन्नों की है। इसमें भ्रष्टाचार साबित करने के लिए कई अहम दस्तावेज भी शामिल किए गए हैं। दोनों पर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इस घोटाले को लेकर एसीबी ने साल 2024 में एफआईआर दर्ज की थी। जांच में सामने आया कि श्रीगणपति ट्यूबवेल और श्रीश्याम ट्यूबवेल नाम की ठेका फर्मों के संचालकों ने इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी प्रमाण पत्र तैयार किए थे। इसके बाद जलदाय विभाग (PHED) के अधिकारियों से मिलीभगत करके करीब 960 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल कर लिए।
मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी केस दर्ज कर महेश जोशी और अन्य को गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद, हाल ही में एसीबी ने महेश जोशी को दोबारा गिरफ्तार किया। फिलहाल, महेश जोशी और संजय बडाया जेल में हैं। जबकि पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल समेत 10 अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही चालान पेश किया जा चुका है। वहीं, जितेंद्र शर्मा, मुकेश गोयल और संजीव गुप्ता के खिलाफ स्थायी वारंट जारी हैं। कुछ अन्य आरोपियों के खिलाफ जांच अभी जारी है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया पर कड़ा रुख अपनाया है। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड तलब किया है।
सुभाष सिहाग और अन्य द्वारा दायर जनहित याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन माथुर व हिमांशु जैन ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने 9 अक्टूबर 2023 को लेफ्टिनेंट कर्नल केसरी सिंह को आरपीएससी का सदस्य नियुक्त किया था।याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस नियुक्ति का कोई सही आधार नहीं था और मंत्रिमंडल द्वारा मुख्यमंत्री को दी गई राय भी उचित नहीं थी।
केसरी सिंह पहले ओबीसी वर्ग के खिलाफ विवादित बयान दे चुके हैं, जिससे साफ होता है कि उनका संवैधानिक प्रावधानों में विश्वास नहीं है। आरपीएससी जैसे संवैधानिक पद पर बैठने वाले व्यक्ति को निष्पक्ष और स्वतंत्र विचारों वाला होना चाहिए। याचिका में कर्नल केसरी सिंह की नियुक्ति को रद्द करने की मांग की गई है, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकार से पूरी कार्यवाही का रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया है।