
Former minister Mahesh Joshi (Photo- Mahesh Joshi Facebook page)
Mahesh Joshi: जल जीवन मिशन घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता महेश जोशी को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। करीब सात महीने से जयपुर सेंट्रल जेल में बंद जोशी अब जेल से बाहर आ सकेंगे। बुधवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने लंबी सुनवाई के बाद जमानत मंजूर कर दी।
बता दें कि जोशी को प्रवर्तन निदेशालय ने 24 अप्रैल को 900 करोड़ रुपए के कथित घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया था। राजस्थान हाईकोर्ट ने 26 अगस्त को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 21 नवंबर को कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया था और अब जमानत का फैसला सुनाया।
इस मामले के दौरान महेश जोशी व्यक्तिगत त्रासदी से भी गुजरे। 28 अप्रैल को उनकी पत्नी का निधन हो गया था। उस समय कोर्ट ने उन्हें चार दिन की अंतरिम राहत दी थी, जिसके बाद से वे लगातार न्यायिक हिरासत में थे।
महेश जोशी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा और विवेक जैन ने तर्क दिया कि जोशी सात महीने से जेल में हैं, जबकि ट्रायल शुरू होने में अभी लंबा समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि ED द्वारा प्रस्तुत रिकॉर्ड में रिश्वत लेने का ठोस आधार नहीं मिलता।
ED का आरोप है कि जोशी ने बेटे की फर्म को लोन दिलाने के नाम पर 55 लाख रुपए की रिश्वत ली थी। बचाव पक्ष ने कहा कि यह पूरी राशि वापस कर दी गई है, जो साबित करता है कि इसे रिश्वत के रूप में लेना सही नहीं ठहराया जा सकता। यदि यह अवैध धन होता, तो लौटाया क्यों जाता। इस सवाल का ED के पास जवाब नहीं है।
एजेंसी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अन्य FIR में भी जोशी की भूमिका सामने आई है और 55 लाख रुपए का संदिग्ध लेन-देन साबित है। उन्होंने तर्क दिया कि राशि लौटाने से अपराध की गंभीरता कम नहीं होती और जमानत मिलने पर आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए जमानत याचिका खारिज करने की मांग की गई।
हालांकि, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जोशी को नियमित जमानत दे दी। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला महेश जोशी और कांग्रेस दोनों के लिए राहत लाया है। हालांकि JJM घोटाले की जांच अभी जारी है और इस मामले का ट्रायल आने वाले महीनों में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़ा मुद्दा बने रहने की संभावना है।
योजना का दुरुपयोग : ग्रामीण इलाकों में पेयजल पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य द्वारा समान भागीदारी में परियोजना चलनी थी। DI (डक्ट आयरन) पाइपलाइन बिछाने की जगह HDPE पाइप डाल दिए गए, जिसकी अनुमति नहीं थी।
पुरानी पाइप को नया बताकर भुगतान : कई जगह पुरानी या बेकार पाइप को नया दिखाकर बिल पास कराए गए। कुछ क्षेत्रों में तो काम ही नहीं हुआ, फिर भी भुगतान उठा लिया गया।
बिना पाइपलाइन डाले उठा लिया पैसा : जांच में सामने आया कि कई किलोमीटर तक पाइपलाइन डाली ही नहीं गई, फिर भी अधिकारियों व ठेकेदारों ने मिलकर करोड़ों का भुगतान करा लिया।
चोरी की पाइप का इस्तेमाल : हरियाणा से चोरी की पाइप लाकर ठेकेदार पदमचंद जैन ने उन्हें नई पाइप की तरह बिछाया और सरकार से भारी भुगतान ले लिया।
फर्जी दस्तावेजों पर टेंडर : पदमचंद जैन ने फर्जी कंपनी के सर्टिफिकेट लगाकर टेंडर हासिल किया। अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद उसे टेंडर दिया गया, क्योंकि उसका एक प्रभावशाली राजनेता से संपर्क बताया जाता है।
Published on:
03 Dec 2025 12:41 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
