जयपुर

पंचायत चुनाव से पहले जयपुर में नकली नोटों का खेल बेनकाब, दिल्ली की जामा मस्जिद से निकला कनेक्शन

जयपुर में पुलिस ने 3.45 लाख रुपए के जाली नोटों के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरोह एक लाख रुपए के असली नोटों के बदले तीन लाख रुपए के नकली नोट देता था।
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Updated: 27 Oct 2026, 10:38 AM IST
Counterfeit Currency Racket
आरोपी शाहवाज खान (Photo-Patrika)

जयपुर. पंचायतीराज चुनाव और आगामी त्योहारों के सीजन के बीच बाजार में नकली नोट खपाने की साजिश का जयपुर पुलिस ने खुलासा किया है। जयपुर कमिश्नरेट की क्राइम स्पेशल टीम (सीएसटी) ने कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से 500 रुपए के नोटों के रूप में कुल 3 लाख 45 हजार रुपए की जाली करेंसी बरामद की गई है। पुलिस अब इस मामले में नकली नोटों की सप्लाई से जुड़े नेटवर्क और उनकी छपाई के ठिकाने का पता लगाने में जुटी है। पुलिस के अनुसार, एनडीपीएस यूनिट से मिली सूचना के आधार पर सीएसटी ने नाहरी का नाका, हाउसिंग बोर्ड निवासी शाहवाज खान (33) को पकड़ा।

एक लाख के बदले तीन लाख रुपए के नकली नोट

स्पेशल पुलिस कमिश्नर ओम प्रकाश ने बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस गिरोह का तरीका लोगों को असली रकम के बदले कई गुना ज्यादा नकली करेंसी उपलब्ध कराना था। गिरोह एक लाख रुपए के असली भारतीय नोटों के बदले तीन लाख रुपए के नकली नोट देने का लालच देता था। इस तरह कम कीमत में अधिक रकम मिलने का झांसा देकर जाली नोटों को बाजार में खपाने की कोशिश की जा रही थी।

पुलिस को आशंका है कि पंचायतीराज चुनाव और त्योहारों के दौरान बाजार में नकदी का लेनदेन बढ़ने का फायदा उठाकर इन नोटों को चलाने की योजना हो सकती थी। हालांकि, नकली नोटों को कहां इस्तेमाल किया जाना था और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

3.45 लाख की पकड़ी खेप

दिल्ली से जयपुर आया आरोपी का साथी फरार

पुलिस के मुताबिक, शाहवाज खान के साथ उसका एक साथी भी दिल्ली से जयपुर आया था। कार्रवाई के दौरान वह पुलिस की पकड़ में नहीं आ सका। अब उसकी तलाश की जा रही है। शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि पुरानी दिल्ली में जामा मस्जिद के पास इस गिरोह का मुख्य सप्लाई ठिकाना है, जहां से देशभर में जाली नोट भेजे जाते हैं।

इस इनपुट के आधार पर जयपुर पुलिस ने दिल्ली पुलिस के साथ जानकारी साझा की है, ताकि सप्लाई नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जयपुर में पकड़ी गई खेप सीधे दिल्ली से लाई गई थी या इसके पीछे कोई स्थानीय संपर्क भी काम कर रहा था। फरार आरोपी की गिरफ्तारी से इस नेटवर्क के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है।

एक ही नोट पर अलग-अलग सीरियल नंबर

बरामद किए गए नोटों की शुरुआती जांच में कई ऐसी खामियां सामने आई हैं, जिनसे उनके नकली होने का संदेह हुआ। पुलिस के अनुसार, कुछ नोटों पर ऊपर और नीचे छपे सीरियल नंबर एक-दूसरे से अलग हैं। उदाहरण के तौर पर, एक नोट के ऊपरी हिस्से पर 0डीजी 787737 और निचले हिस्से पर 0डीजी 787731 अंकित मिला। असली नोटों की पहचान से जुड़ी इन जानकारियों के आधार पर पुलिस ने करेंसी को संदिग्ध माना है।

इसके अलावा नोटों पर महात्मा गांधी की तस्वीर और छपाई भी धुंधली दिखाई दी। कागज की गुणवत्ता भी सामान्य नोटों की तुलना में खराब बताई गई है। इन शुरुआती संकेतों के बाद पुलिस अब बरामद नोटों को विस्तृत जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेज रही है।

छपाई के ठिकाने का पता लगाने में जुटी पुलिस

एफएसएल की जांच से नोटों की बनावट, छपाई और इस्तेमाल की गई सामग्री से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करने में मदद मिलेगी। पुलिस का अगला लक्ष्य यह पता लगाना है कि जाली नोट कहां तैयार किए जा रहे थे और उन्हें जयपुर तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका थी। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है या नहीं।

फिलहाल एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है, जबकि उसका साथी फरार है। दिल्ली में बताए जा रहे सप्लाई ठिकाने और अन्य संभावित संपर्कों की जांच जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि आगे की कार्रवाई से नकली करेंसी के नेटवर्क की अन्य कड़ियां सामने आ सकती हैं।

Updated on:
27 Oct 2026, 10:38 AM IST
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