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ओमप्रकाश शर्मा / जयपुर। भाजपा सरकार के समय हुई कर्ज माफी से सहकारी बैंक अभी उभर नहीं पाए हैं। उससे पहले ही वर्तमान सरकार ने दो लाख रुपए तक के कर्ज माफ करने की घोषणा कर दी है। सरकार भले ही बजट की व्यवस्था में जुटी है, लेकिन किसान को माफी से ज्यादा नए कर्ज की जरूरत है। कर्ज लेने के लिए किसान सहकारी बैंकों के यहां चक्कर लगा रहे हैं। रबी की फसल के लिए किसान को कर्ज नहीं मिल रहा है। सहकारी बैंकों ने ऋण वितरण का जो लक्ष्य तय किया था, वह तीस प्रतिशत भी पूरा नहीं हुआ है। यहां तक कि भरतपुर जैसे जिले में मात्र एक प्रतिशत ऋण वितरण हुआ है।
खरीफ के लिए 10 हजार और रबी सीजन के लिए छह हजार करोड़ रुपए के ऋण वितरण करने का लक्ष्य तय किया था। ऋण माफी के चलते खरीफ में ऋण वितरण प्रभावित होना शुरू हुआ। खरीफ में 8 हजार 3 सौ करोड़ के ही ऋण वितरित हुए। ऐसे में बचे हुए 17 सौ करोड़ रुपए रबी सीजन के लिए स्थानांतरित कर दिए। अब रबी में करीब 7700 करोड़ रुपए वितरित करने थे। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए आदेश भले ही दे दिए हों, लेकिन स्थिति अलग है। तय लक्ष्य के मुकाबले अभी करीब 22 सौ करोड़ रुपए ही वितरित किए गए हैं। माली हालत के चलते बैंक ऋण वितरण नहीं कर रहे हैं। ऋण वितरण की धीमी गति पर विभाग चिंता जता रहा है।
यह बात अलग है कि अभी तक समस्या का निराकरण नहीं किया गया। सरकार की अभी प्राथमिकता ऋण माफी है। रोज इसी मुद्दे को लेकर बैठक हो रही है। खुद सहकारिता सचिव अभय कुमार ने बुधवार और गुरुवार को सहकारी बैंक अधिकारी व सहकारी समितियों के अधिकारियों की बैठक ली। अभी तक कर्ज माफी के लिए बजट की व्यवस्था नहीं हो सकी है। इन्हीं बैठकों बीच गत सप्ताह ऋण वितरण स्थिति के लिए बैठक बुलाई गई थी, जिसमें खुलासा हुआ है कि वितरण की गति चिंताजनक स्थिति में है।
जिलों में ऋण वितरण का लक्ष्य नहीं हुआ पूरा
भरतपुर में जहां लक्ष्य का एक प्रतिशत ही वितरण हुआ है तो अलवर में यह सोलह प्रतिशत तक पहुंचा है। अन्य जिलों की स्थिति भी ज्यादा ठीक नहीं है। नागौर में लक्ष्य 7000 लाख रुपए का ऋण वितरण का था, जिसके मुकाबले मात्र 479 लाख रुपए का ऋण दिया गया है। इसी तरह डूंगरपुर में 9000 लाख के मुकाबले 1233 तथा बांसवाड़ा व उदयपुर में 14000 लाख के मुकाबले मात्र 2111 लाख रुपए का ऋण वितरण किए हैं।
बजट ही नहीं तो बैंकों के हालात सुधरना मुश्किल
भाजपा सरकार ने सहकारी बैंक के पचास हजार रुपए तक के कर्ज माफ किए थे। इस पर करीब आठ हजार करोड़ रुपए का भार आया। सरकार ने उस समय बजट का प्रावधान नहीं कियाा। एनसीडीसी से अपेक्स बैंक ने 22 सौ करोड़ रुपए लोन लिया। बाकी बजट की व्यवस्था अभी तक नहीं हुई। ऐसी स्थिति में बैंकों के पास ऋण वितरण के लिए बजट नहीं बचा है। वर्तमान सरकार को पुराने बकाया बजट के साथ दो लाख रुपए तक की कर्ज माफी का बजट भी देना है। इसके बिना किसानों को कर्ज मिलना मुश्किल होगा। सरकार की प्राथमिकता है कि सहकारी ऋण वितरण प्रणाली से और अधिक किसानों को जोड़ा जाए। बजट के अभाव में अधिक किसानों को जोडऩा तो दूर जो पहले से जुड़े हुए किसान हैं उन्हें भी ऋण मिलना मुश्किल दिख रहा है। सरकार को कर्ज माफी की घोषणा को कारगार साबित करने के लिए 18 हजार करोड़ रुपए की आवश्यकता है। यह बजट नहीं मिलने तक बैंक की हालत में सुधार होना मुश्किल है।