राजस्थान में निवर्तमान सरपंचों को ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने के निर्णय से पहले सरकार ने तीन राज्यों के मॉडल का अध्ययन कराया।
Rajasthan Gram Panchayat Upadate: राजस्थान में निवर्तमान सरपंचों को ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त करने के निर्णय से पहले राजस्थान सरकार ने करीब एक माह तक मंथन किया। साथ ही मध्यप्रदेश, झारखंड और उत्तराखंड राज्यों में अपनाए गए मॉडल का अध्ययन कराया और उसके बाद विधिक राय ली गई। इस बीच सरपंच संघ के प्रतिनिधि मंडल से भी चर्चा की गई। सरपंचों ने भी इस पर सहमति जताई।
राजस्थान सरपंच संघ के प्रतिनिधि मंडल ने ग्राम पंचायतों में सरपंचों को ही प्रशासक लगाने पर खुशी जताई है। सरपंचों ने बुधवार को सीएम सरपंचों की भावना के अनुसार मुलाकात की थी। सीएम ने ही निर्णय करने का आश्वासन दिया था। इस दौरान केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम, सरपंच के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर गढ़वाल और टोंक जिले की आवा ग्राम पंचायत के सरपंच दिव्यांश एम भारद्वाज सहित कई सरपंच मौजूद थे।
बता दें कि सरकार ने गुरुवार को सरपंचों को प्रशासक बनाकर पंचायतों का संचालन करने का आदेश जारी किया। प्रदेश में 6759 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 17 जनवरी, 2024 को समाप्त हो रहा था। ऐसे में सरकार ने राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह फैसला लिया गया है।
सरकार ने राज्य में ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ को लेकर पंचायतों में सरपंचों को प्रशासक नियुक्त किया है। जिससे की आगामी दिनों में राज्य में ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ लागू कर एक साथ चुनाव कराया जा सकें। क्योंकि ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ प्रणाली से पंचायत चुनावों को विधानसभा और लोकसभा चुनावों के साथ कराने से वित्तीय संसाधनों और मानव संसाधनों की बचत होगी।