राजस्थान में सरकारी स्कूल के शिक्षकों ने ट्रांसफर में देरी, गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ और गर्मी की छुट्टियां घटाने के विरोध में 14 मई से आंदोलन का एलान किया है। शिक्षक संगठनों ने सरकार पर समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाया।
जयपुर: राजस्थान के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों और सरकार की उदासीनता के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले शिक्षकों ने आगामी 14 मई से चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
शिक्षकों का आरोप है कि सरकार के दो साल से अधिक का कार्यकाल बीत जाने के बाद भी उनकी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शिक्षकों की नाराजगी के पीछे कई बड़े कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख ग्रेड-III शिक्षकों के तबादलों में देरी और गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ है। इसके अलावा, हाल ही में छुट्टियों में की गई कटौती को लेकर भी भारी रोष है।
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महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश पुष्करणा ने कहा कि शिक्षण दिवस बढ़ाने के नाम पर गर्मी की छुट्टियों में कटौती करना पूरी तरह गलत है। राजस्थान की भीषण गर्मी को देखते हुए यह फैसला भौगोलिक परिस्थितियों के विपरीत है।
राज्य में कई स्कूलों को कागजों पर 'सीनियर सेकेंडरी' का दर्जा तो दे दिया गया है, लेकिन वहां जरूरी शिक्षकों के पद स्वीकृत नहीं किए गए हैं। आलम यह है कि कई बड़े स्कूलों में प्राइमरी स्तर के शिक्षक भी पूरे नहीं हैं।
शिक्षकों का आरोप है कि गृह जिलों में हजारों पद खाली होने के बावजूद उन्हें जबरन दूसरे जिलों में तैनात किया जा रहा है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
संगठन के प्रदेश महामंत्री महेंद्र कुमार लखारा ने बताया कि प्रदेश सरकार के गठन के साथ ही संगठन ने नियमित संवाद एवं वार्ता के माध्यम से शिक्षकों की विभिन्न समस्याओं के निराकरण का प्रयास किया, लेकिन सरकार और उसके अधिकारियों की हठधर्मिता एवं उदासीनता के कारण सरकार के दो वर्ष से अधिक के कार्यकाल में भी शिक्षकों के ज्वलंत मुद्दों का समाधान नहीं हो पाया। इससे प्रदेश के लाखों शिक्षकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
संगठन ने शिक्षकों की विभिन्न मांगों को लेकर लगातार वार्ता के माध्यम से समाधान के प्रयास किए। इनमें प्रमुख मांगें शिविरा पंचांग में संशोधन, तृतीय श्रेणी सहित सभी संवर्गों के स्थानांतरण, तृतीय श्रेणी शिक्षकों की पदोन्नति, वर्ष 2019 से अब तक क्रमोन्नत सभी विद्यालयों में पदों की वित्तीय स्वीकृति जारी करना एवं स्टाफिंग पैटर्न लागू करना, RGHS को सुचारु रूप से जारी रखना, तृतीय श्रेणी शिक्षकों और प्रबोधकों की वेतन विसंगति दूर करना, संविदा शिक्षकों को नियमित करना तथा संगठन के मांगपत्र अनुसार सभी मांगों का त्वरित समाधान करना शामिल हैं।
संघर्ष समिति के संयोजक सम्पत सिंह ने कहा कि हाल ही में सरकार द्वारा लिए गए कई निर्णयों से शिक्षकों में व्यापक आक्रोश व्याप्त है। महासंघ के प्रदेश नेतृत्व ने कहा कि अधिकारियों ने शासन को भ्रामक तथ्यों के आधार पर भ्रमित किया है।
शिक्षण दिवस बढ़ाने के नाम पर ग्रीष्मकालीन अवकाशों में की गई कटौती पूरी तरह अवैज्ञानिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों के विपरीत है। राजस्थान जैसे प्रदेश में, जहां भीषण गर्मी सर्वविदित है, वहां पूर्व में भौगोलिक आधार पर ही अवकाश निर्धारित किए गए थे।
विडंबना यह है कि एक ही राज्य में उच्च शिक्षा के लिए 60 दिवस, केंद्रीय विद्यालयों में 61 दिवस तथा नवोदय विद्यालयों में 56 दिवस का अवकाश निर्धारित है, जबकि प्रदेश के माध्यमिक एवं प्रारंभिक विद्यालयों में इसे घटाकर मात्र 35 दिवस कर दिया गया है।