
राजस्थान के जल प्रबंधन के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित एक अति-महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय बैठक के बाद अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र को मिलने वाला यमुना का पानी पारंपरिक खुली नहरों के रास्ते नहीं, बल्कि अत्याधुनिक बंद पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए सीधे राज्य की सीमा में प्रवेश करेगा। केंद्र सरकार की देखरेख में राजस्थान और हरियाणा के बीच इस परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर मेमोरेन्डम ऑफ एग्रीमेंट (MoA) के सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अंतिम सहमति बन चुकी है। यह खबर उन लाखों लोगों के लिए एक बड़ा संबल है जो दशकों से शुद्ध पेयजल और सिंचाई के पानी की कमी का सामना कर रहे हैं। इस ऐतिहासिक समझौते को समझने के लिए इसके 10 सबसे महत्वपूर्ण और बड़े बिंदुओं को जानना बेहद आवश्यक है।
इस वृहद और दूरगामी जल परियोजना के क्रियान्वयन से जुड़े ये 10 मुख्य बिंदु हैं, जो आने वाले समय में राजस्थान की पूरी भौगोलिक और सामाजिक-आर्थिक तस्वीर को बदलने की क्षमता रखते हैं:
इस पूरी परियोजना का सबसे क्रांतिकारी और तकनीकी हिस्सा यह है कि पानी को हरियाणा से राजस्थान तक लाने के लिए खुली नहर नहीं बनाई जाएगी। पूरी वितरण प्रणाली में विशालकाय अंडरग्राउंड पाइपलाइनों का नेटवर्क बिछाया जाएगा। इस लीक से हटकर उठाए गए कदम का मुख्य उद्देश्य पानी के आधुनिक प्रबंधन को सुदृढ़ करना है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, पारंपरिक खुली नहरों में यात्रा के दौरान अत्यधिक गर्मी के कारण पानी का एक बड़ा हिस्सा वाष्पीकरण के कारण हवा में उड़ जाता है और बहुत सा पानी जमीन में रिसकर बर्बाद हो जाता है। पाइपलाइन प्रणाली लागू होने से पानी का रिसाव और वाष्पीकरण बिल्कुल शून्य (0) हो जाएगा, जिससे जल संरक्षण सुनिश्चित होगा।
खुली नहर बनाने के लिए सरकार को हजारों हेक्टेयर कृषि और निजी भूमि का बड़े पैमाने पर स्थायी अधिग्रहण करना पड़ता है, जिसमें सालों का समय और भारी मुआवजा राशि खर्च होती है। पाइपलाइन अंडरग्राउंड बिछाई जाएगी, जिससे जमीन के ऊपर का मालिकाना हक प्रभावित नहीं होगा और किसानों को भी अपनी जमीनों को खोने का डर नहीं रहेगा।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के अनुसार, यह पूरी योजना विशेष रूप से राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एक लाइफलाइन साबित होगी। इसके जरिए चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों के लाखों लोगों के जीवन स्तर में सीधे तौर पर बड़ा और सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।
बैठक में लंबे समय से अटकी किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े मुद्दों का भी पूर्ण निस्तारण कर लिया गया है। इस बांध के पूरी तरह कार्यात्मक होते ही राजस्थान को यमुना जल के साथ-साथ इस बहुउद्देशीय परियोजना से भी अपने हिस्से का अतिरिक्त पानी प्राप्त होने लगेगा, जिससे राज्य का जल संकट स्थाई रूप से दूर होगा।
यमुना नदी और उससे जुड़ी जल परियोजनाओं को लेकर कुल 6 राज्यों (राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) के बीच कई तकनीकी और विधिक मतभेद चल रहे थे। केंद्र सरकार के कुशल हस्तक्षेप के बाद इन सभी अंतर्राज्यीय विवादों का सकारात्मक और विधिक समाधान निकाल लिया गया है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बैठक के बाद स्पष्ट किया कि इस परियोजना के तहत केवल नियमित यमुना जल ही नहीं, बल्कि मानसून के दौरान होने वाली अतिरिक्त भारी वर्षा के पानी को भी विशेष तकनीकी जलाशयों में सहेजकर पाइपलाइन के माध्यम से राजस्थान की प्यासी धरती तक भेजा जाएगा।
मरुधरा को पानीदार बनाने के लिए ऊपरी यमुना बेसिन पर बनने वाली तीन बड़ी परियोजनाओं— रेणुकाजी बांध, लखवार जल विद्युत परियोजना और किशाऊ बांध के क्रियान्वयन को आपस में जोड़ा जा रहा है। इन तीनों के संयुक्त पानी से राजस्थान के साथ-साथ दिल्ली और हरियाणा के नागरिकों की आवश्यकताओं को भी पूरा किया जाएगा।
यमुना जल का यह पाइपलाइन नेटवर्क इस प्रकार डिजाइन किया जा रहा है कि इससे न केवल शेखावाटी के गांवों और कस्बों में शुद्ध पेयजल पहुंचेगा, बल्कि स्थानीय अन्नदाताओं को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। इसके अलावा, क्षेत्र में लगने वाले नए उद्योगों को भी पानी आवंटित किया जा सकेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
राज्य सरकार ने इस पूरी परियोजना को देश के दीर्घकालिक विजन 'विकसित भारत 2047' के साथ पूरी तरह से सिंक किया है। आधुनिक जल प्रबंधन और कुशल वितरण व्यवस्था के बिना एक समृद्ध राज्य की कल्पना असंभव है, इसलिए इस पाइपलाइन प्रोजेक्ट को मिशन मोड पर पूरा करने की समय सीमा तय की जा रही है।
इस समझौते के विधिक और व्यावहारिक क्रियान्वयन को गति देने के लिए राजस्थान और हरियाणा के जल संसाधन विभागों की संयुक्त तकनीकी टीम ने रात-दिन काम करके एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पहले ही तैयार कर ली है। इस पूरी रिपोर्ट को केंद्रीय जल आयोग के पास अंतिम तकनीकी स्क्रूटनी और वित्तीय मंजूरी के लिए भेज दिया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि खुली नहर की जगह जब पाइपलाइन बिछाने का विधिक प्रस्ताव केंद्रीय जल आयोग के पास पहुंचा, तो इसकी तकनीकी व्यवहार्यता को काफी सराहा गया। बंद पाइपलाइन नेटवर्क होने के कारण रास्ते में पानी की चोरी होने या पानी के प्रदूषित होने की संभावना भी पूरी तरह से समाप्त हो जाएगी, जिससे शुद्ध पेयजल सीधे मुख्य जलाशयों तक डिलीवर किया जा सकेगा।