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10 राज्यों में विशेषज्ञों की सीधी भर्ती, तो राजस्थान में जिला अस्पताल सिर्फ MBBS डॉक्टरों के भरोसे क्यों? जिम्मेदार कौन?

Rajasthan District Hospitals: राजस्थान के जिला अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी के चलते स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह वेंटिलेटर पर है। हाल ही में कोटा, बीकानेर और जोधपुर सहित कई जिलों में प्रसूताओं और मरीजों की मौत का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। 'पत्रिका पड़ताल' में खुलासा हुआ है कि चिकित्सा विभाग की नीतिगत खामी और सुस्ती के कारण जिला अस्पताल सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टरों के भरोसे चल रहे हैं।
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जयपुर

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Arvind Rao

Jun 24, 2026

Rajasthan Specialist Doctors

रेफरल की लाइन में दम तोड़ रहे मरीज, एमबीबीएस के भरोसे जिला अस्पताल (फोटो-एआई)

Rajasthan Specialist Doctors: जयपुर: 'सामान्य प्रसव में भी रेफर, हड्डी टूटे तो भी रेफर' राजस्थान के छोटे अस्पतालों की यही हकीकत अब मरीजों की जान ले रही है। एमडी-एमएस विशेषज्ञ डॉक्टरों की सीधी भर्ती सिर्फ मेडिकल पढ़ाई तक सीमित होने से जिला, उप जिला और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एमबीबीएस मेडिकल ऑफिसर के भरोसे चल रहे हैं।

हाल ही में कोटा, बीकानेर, नागौर और डीडवाना में प्रसूताओं की मौत और जोधपुर में प्रसूताओं की हालत गंभीर होने के मामलों ने इस नीतिगत विसंगति को फिर उजागर कर दिया। पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि 10 राज्यों में छोटे अस्पतालों तक विशेषज्ञों की सीधी भर्ती होती है।

इधर उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, केरल और आंध्रप्रदेश समेत 10 से ज्यादा राज्यों में एमडी-एमएस डॉक्टरों की सीधी भर्ती सीएचसी, एसडीएच और जिला अस्पताल स्तर पर की जाती है। वहां ग्रामीण मरीजों को ब्लॉक स्तर पर ही गायनी, पीडियाट्रिक, सर्जरी और ऑर्थो विशेषज्ञ मिल जाते हैं। नतीजा वहां रेफरल 50 प्रतिशत से ज्यादा घट गए और मेडिकल कॉलेज पर दबाव कम हुआ है।

30 मिनट में मिलना चाहिए विशेषज्ञ

मातृ मृत्यु दर घटाने के लिए गर्भवती को 30 मिनट में विशेषज्ञ मिलना चाहिए। राजस्थान में हम 3 घंटे में भी नहीं दे पा रहे हैं। कोटा और बीकानेर की मौत के बाद भी सिस्टम खामोश है। नियम बदलना जरूरी है। सीएचसी को 4 विशेषज्ञ गायनी, पीडियाट्रिक, एनेस्थीसिया, सर्जरी मिल जाए तो 50 प्रतिशत रेफरल वहीं रुक जाएगा।
-डॉ. अभिषेक व्यास, एक्सपर्ट

नागौर में प्रसूता की मौत का मामला

प्रसूता रूकमा की मौत के मामले में दूसरे दिन भी मंगलवार को जिला अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरना जारी रहा। परिजन चिकित्सक और नर्सिंग स्टॉफ पर कार्रवाई, आर्थिक सहायता और नवजात के भरण-पोषण की मांग पर अड़े रहे, जिससे पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका। शाम को बड़ी संख्या में लोगों ने परिजन के साथ कलक्ट्रेट तक कैंडल मार्च भी निकाला।

चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से सवाल-जवाब

मौतों के लिए गर्मी, दवा, रेफरल सिस्टम जिम्मेदार!

सवाल: कोटा, बीकानेर और अब जोधपुर में मौतें, विभाग क्या कर रहा है?
मंत्रीः कोटा, बीकानेर और जोधपुर के मामलों का आपस में कोई कनेक्शन नहीं है। कोटा में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में सक्रिय दवा नहीं मिली। दवा के ट्रांसपोर्ट के दौरान खराब होने की आशंका है। कोटा में तेज गर्मी भी इसका एक कारण हो सकती है। उस फैक्ट्री को बंद कर दिया है। स्टॉफ पर भी कार्रवाई की गई है। बीकानेर और जोधपुर के मामले रेफर्ड और गंभीर थे।

सवाल: कम अवधि में इतनी मौतें, जिम्मेदार कौन?
मंत्रीः राजस्थान में एक साल में तीन लाख प्रसव पर 48 मौतों का आंकड़ा है। मातृ मृत्यु दर तीन साल में प्रति लाख 0.8 से गिरकर 0.6 रह गई है। यही चौंकाने वाली बात है कि चंद दिनों में सरकारी अस्पताल की कुछ मौतों को बिना पड़ताल उजागर किया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में निजी अस्पतालों से भी बिगड़े हुए केस आते हैं।

सवाल: छोटे अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती ही नहीं होती?
मंत्रीः यह नीतिगत बदलाव की जरूरत हो सकती है, जिसकी हम समीक्षा कराएंगे। फिलहाल, हम एम्स की सलाह के आधार पर एसओपी को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं।

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