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Rajasthan News : विवाह और तलाक से लेकर लिव-इन रिलेशनशिप तक, जानें जल्द लागू हो रहे ‘समान नागरिक’ क़ानून की 10 बड़ी बातें

राजस्थान में समान नागरिक संहिता (UCC) की तैयारी तेज। विवाह, तलाक, लिव-इन रजिस्ट्रेशन और पैतृक संपत्ति नियमों में होंगे बड़े बदलाव। न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित।

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Rajasthan Uniform Civil Code 2026 Bill Draft Committee Major Changes Updates

CM Bhajanlal Sharma - File Pic

राजस्थान में सभी जातियों, धर्मों और समुदायों के नागरिकों के लिए एक समान नागरिक कानून जल्द लागू होने जा रहा है। 
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने 'राजस्थान समान नागरिक संहिता, 2026' (The Rajasthan Uniform Civil Code, 2026) का कानूनी ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन कर दिया है। शासन सचिवालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने इस ऐतिहासिक निर्णय की विस्तृत जानकारी साझा की। मंत्रियों ने बताया कि 14 अप्रैल 2026 को आयोजित राज्य मंत्रिमण्डल की बैठक में इस विषय पर सार्थक कार्रवाई करने का नीतिगत निर्णय लिया गया था। इस कानून का मुख्य ध्येय अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करना और उन्हें पुरुषों के बराबर कानूनी अधिकार दिलाना है।

राजस्थान समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक : 10 बड़ी बातें

राजस्थान में लागू होने जा रहे इस नए कानून के 10 सबसे बड़े और महत्वपूर्ण प्रावधान इस प्रकार हैं:

  1. एक समान नागरिक कानून: राज्य में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में एक जैसा कानून लागू होगा, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो।
  2. बहुविवाह पर पूर्ण रोक: नए कानून के लागू होने के बाद प्रदेश में बहुविवाह (एक से अधिक शादी करने की प्रथा) पर पूरी तरह कानूनी रोक लग जाएगी।
  3. विवाह का अनिवार्य पंजीकरण: राज्य में होने वाली हर शादी का सरकारी रिकॉर्ड में अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
  4. तलाक का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: आपसी सहमति या कानूनी माध्यम से होने वाले तलाक का भी अनिवार्य पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा, जिससे कोई भी पक्ष कानूनी विसंगतियों का फायदा न उठा सके।
  5. लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन: समाज में सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए अपना अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक होगा।
  6. पैतृक संपत्ति में बेटियों को समान हक: माता-पिता की संपत्ति पर बेटा और बेटी दोनों का कानूनी रूप से बिल्कुल बराबर का अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा।
  7. लैंगिक समानता : विभिन्न पर्सनल लॉ के कारण महिलाओं के अधिकारों में होने वाली विसंगतियों और भेदभाव को समाप्त कर उन्हें पुरुषों के समकक्ष विधिक सुरक्षा दी जाएगी।
  8. गोद लेने के नियम होंगे आसान: अनाथ बच्चों को गोद लेने और भरण-पोषण से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाया जाएगा।
  9. आदिवासी समुदायों को संवैधानिक सुरक्षा: राजस्थान के आदिवासी समुदाय के पारंपरिक रीति-रिवाजों, संस्कृति और उनकी विशिष्ट पहचान को इस कानून के दायरे से सुरक्षित रखा जाएगा और उन्हें पूर्ण संवैधानिक सुरक्षा मिलेगी।
  10. संवैधानिक प्रावधानों का पालन: यह पूरा कानून भारतीय संविधान के भाग 4 में वर्णित राज्य की नीति के निर्देशक तत्वों के अंतर्गत आने वाले अनुच्छेद 44 के प्रावधानों के मद्देनजर तैयार किया जा रहा है।

सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति की अध्यक्षता में बनी उच्च स्तरीय समिति

विधेयक के प्रारूप को पूरी तरह से विधिक, त्रुटिहीन और प्रगतिशील बनाने के लिए राज्य सरकार ने देश की बेहद अनुभवी और उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति श्रीमती रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक ड्राफ्टिंग कमेटी का गठन किया है।

इस समिति के मुख्य सदस्य इस प्रकार हैं:

  • अध्यक्ष: रंजना प्रकाश देसाई (सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति, सुप्रीम कोर्ट)।
  • प्रशासनिक सदस्य: शत्रुघ्न सिंह (सेवानिवृत्त आई.ए.एस. अधिकारी)।
  • विधिक विशेषज्ञ: बसंत सिंह छाबा (अतिरिक्त महाधिवक्ता, राजस्थान उच्च न्यायालय)।
  • शैक्षणिक सदस्य: रामस्वरूप अग्रवाल (सेवानिवृत्त प्राचार्य, राजकीय विधि महाविद्यालय, श्रीगंगानगर)।
  • विशेषज्ञ सदस्य: डॉ. शुचि चौहान।
  • सदस्य सचिव: अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह विभाग, राजस्थान सरकार) को इस समिति का सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है।

जन-संवाद और आम जनता से मांगे सुझाव

गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस कानून को थोपने के बजाय पूरी तरह से पारदर्शी और समावेशी बनाना चाहती है। इसके लिए गठित की गई उच्च स्तरीय समिति राजस्थान के सभी संभाग स्तरों पर जाकर आम जनता, सामाजिक संगठनों, कानूनविदों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों से सीधा जन-संवाद स्थापित करेगी।

इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार द्वारा एक विशेष आधिकारिक वेबसाइट भी लॉन्च की जा रही है। इस डिजिटल माध्यम के जरिए राजस्थान का कोई भी आम नागरिक घर बैठे इस प्रस्तावित कानून को लेकर अपने बहुमूल्य सुझाव, आपत्तियां और विचार सीधे ड्राफ्टिंग कमेटी तक ऑनलाइन भेज सकेगा। जनता से प्राप्त सकारात्मक सुझावों को विधेयक के अंतिम प्रारूप में शामिल किया जाएगा।

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