Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि भर्ती परीक्षा से पहले पात्रता परीक्षा का परिणाम आ गया तो अभ्यर्थी चयन के लिए पात्र माना जाएगा, भले मार्कशीट या डिग्री बाद में जारी हुई हो।
Rajasthan High Court : राजस्थान हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि भर्ती परीक्षा से पहले पात्रता परीक्षा का परिणाम आ गया तो अभ्यर्थी चयन के लिए पात्र माना जाएगा, भले मार्कशीट या डिग्री बाद में जारी हुई हो। राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग व संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को नियुक्ति देने की प्रक्रिया 90 दिन में पूरी कर ली जाए।
न्यायाधीश अशोक कुमार जैन ने हर्ष कुमार की याचिका निस्तारित करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता ने प्रोग्रामर भर्ती-2024 में कट ऑफ से ज्यादा मार्क्स प्राप्त किए, लेकिन राजस्थान लोक सेवा आयोग ने पात्रता परीक्षा की अंतिम मार्कशीट भर्ती परीक्षा के बाद जारी होने के कारण चयन सूची में शामिल नहीं किया। हालांकि पात्रता परीक्षा भर्ती परीक्षा से पहले पास कर ली थी।
अधिवक्ता तनवीर अहमद ने कोर्ट बताया कि याचिकाकर्ता ने महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय रोहतक से बीटेक की डिग्री ली है। प्रोग्रामर भर्ती का फॉर्म भरते समय RPSC ने यह शर्त रखी थी कि फाइनल ईयर-सेमेस्टर के अभ्यर्थी भर्ती में हिस्सा ले सकते हैं, लेकिन उन्हें 27 अक्टूबर 2024 से पहले अंतिम परीक्षा पास करनी होगी।
उन्होंने हाई कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता के अंतिम सेमेस्टर का परिणाम 6 जुलाई 2024 को आ गया। इसमें उसने बीटेक की परीक्षा पास कर ली। लेकिन यूनिवर्सिटी ने मार्कशीट 20 दिसंबर 2024 को जारी की। जिसे आधार बनाकर आरपीएससी ने कट ऑफ से ज्यादा मार्क्स प्राप्त करने के बाद भी उसका चयन नहीं किया।
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा यूनिवर्सिटी में प्रशासनिक देरी के कारण परिणाम दिसंबर 2024 में जारी किया गया। परीक्षा पास करने के बाद याचिकाकर्ता का न तो कोई प्रोजेक्ट वर्क और न ही कोई पाठ्यक्रम का कार्य लंबित था। इसलिए आरपीएससी और संबंधित विभाग को निर्देशित किया जाता है कि याचिकाकर्ता को 90 दिन में नियुक्ति दें।
एक अन्य फैसले में जोधपुर में राजस्थान हाईकोर्ट ने बाड़मेर जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष फतह खान को राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी। साथ ही राज्य सरकार व अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी किए गए।
न्यायाधीश मुन्नुरी लक्ष्मण की एकल पीठ ने यह आदेश फतह खान की आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोतवाली थाने में दर्ज एफआईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा 197(1)(डी) के तहत है, जिसमें कथित भाषण से राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल टिप्पणी का आरोप है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया अपराध नहीं मानते हुए गिरफ्तारी पर रोक दी, हालांकि जांच जारी रहेगी।