Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट में पिछले दो साल से साल में दो बार मुख्य न्यायाधीश बदल रहे हैं और बीच में कुछ समय पद खाली भी रहा।
Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट में पिछले दो साल से साल में दो बार मुख्य न्यायाधीश बदल रहे हैं और बीच में कुछ समय पद खाली भी रहा। केन्द्र में विधि मंत्रालय का जिम्मा फिर राजस्थानी सांसद के पास है, ऐसे में उनसे अपेक्षा बढ़ रही है कि मुख्य न्यायाधीश कम से कम सालभर रुककर जाए ताकि स्थानीय माहौल व जरूरतों को समझ सके।
अक्टूबर 2021 में न्यायाधीश अकील कुरैशी यहां मुख्य न्यायाधीश के रूप में आए, जिनका कार्यकाल करीब पांच माह रहा। उनके बाद जून 22 में करीब सवा माह के लिए नए मुख्य न्यायाधीश आए, जून में अवकाश का समय भी उनके कार्यकाल में शामिल है। दो माह बाद आए नए मुख्य न्यायाधीश करीब चार माह यहां रहकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। फिर करीब पौने चार माह बाद आए मुख्य न्यायाधीश सवा पांच माह बाद सुप्रीम कोर्ट चले गए। उनके कार्यकाल में ग्रीष्मकालीन अवकाश की अवधि भी शामिल है। अब यह बात चल निकली है कि यहां का मुख्य न्यायाधीश बनने का मतलब जल्दी सुप्रीम कोर्ट जाने की गारंटी। इस बीच स्थिति यह है कि करीब डेढ़ माह हो गए और अभी तक नया मुख्य न्यायाधीश नहीं लगाया गया। ऐसे में राजस्थान के वकीेलों में इस बात को लेकर नाराजगी जन्म ले रही है कि यहां जो भी मुख्य न्यायाधीश लगाया जा रहा है, माहौल समझने और स्थिति सुधारने का प्रयास करने से पहले ही उनका कार्यकाल पूरा हो जाता है। केन्द्र में विधि मंत्रालय का जिम्मा अर्जुनराम मेघवाल के पास है, ऐसे में नाराजगी और बढ़ रही है।
| मुख्य न्यायाधीश | कार्यकाल |
| न्यायाधीश अकील कुरैशी | 12 अक्टूबर 21 से 6 मार्च 22 |
| न्यायाधीश एस एस शिंदे | 21 जून 22 से 1 अगस्त 22 |
| न्यायाधीश पंकज मित्तल | 14 अक्टूबर 22 से 5 फरवरी 23 |
| न्यायाधीश ए जी मसीह | 30 मई से 9 नवम्बर 23 |
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मुख्य न्यायाधीश लंबे समय के लिए आए, तो प्रशासनिक कार्य और अच्छे तरीके से होंगे। हालांकि न्यायाधीश एस रविन्द्र भट्ट यहां कुछ माह के लिए ही मुख्य न्यायाधीश रहे, लेकिन उन्होंने हर जगह जाकर समस्याओं को समझा और सुधार किया। लंबे समय के लिए सीजे आए तो कोर्ट, न्यायिक अधिकारी व सिस्टम को ज्यादा फायदा होगा। विधि मंत्री सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कर सकते, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से बातकर देशभर के लिए पॉलिसी तय करा सकते हैं कि एक न्यूनतम कार्यकाल तय होना चाहिए, ताकि स्थानीय माहौल व जरूरतों को समझ सके। सचिन आचार्य, वरिष्ठ अधिवक्ता व को-चेयरमैन, राजस्थान विधिज्ञ परिषद