
राजस्थान के सबसे सुरक्षित और वीवीआईपी परिसरों में शुमार राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर और जोधपुर मुख्य पीठ को एक बार फिर ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। इस ताजा धमकी भरे संदेश के सामने आते ही राज्य के न्यायिक और पुलिस प्रशासन में भारी हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में एहतियात बरतते हुए पुलिस और बम निरोधक दस्ते की टीमों ने दोनों उच्च न्यायालय परिसरों को अपने घेरे में ले लिया है और वकीलों, कर्मचारियों व आम जनता की एंट्री को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।
सबसे गमभीर और चिंताजनक बात ये है कि पिछले अक्टूबर महीने से लेकर अब तक 12 से अधिक बार राजस्थान हाईकोर्ट को इस तरह के धमकी भरे संदेश मिल चुके हैं, लेकिन देश और प्रदेश की हाई-टेक जांच एजेंसियां और साइबर एक्सपर्ट्स हर बार इन फर्जी ईमेल भेजने वाले मास्टरमाइंड तक पहुंचने में पूरी तरह से विफल साबित हुए हैं।
बार-बार मिलने वाली इन खोखली धमकियों के कारण न केवल हजारों पेंडिंग केसों पर होने वाली न्यायिक सुनवाई प्रभावित हो रही है, बल्कि कोर्ट परिसर में न्याय की आस लेकर आने वाले दूर-दराज के गरीब फरियादियों, वकीलों और जजों के भीतर एक अनजाना डर और दहशत का माहौल पैदा किया जा रहा है।
सोमवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब राजस्थान हाईकोर्ट प्रशासन को एक अज्ञात पते से धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ। इस ईमेल में जयपुर और जोधपुर दोनों ही परिसरों को रिमोट और टाइमर बम से उड़ाने की बात लिखी गई थी। कोर्ट प्रशासन ने बिना किसी देरी के तुरंत स्थानीय पुलिस कमिश्नरेट और खुफिया एजेंसियों को मामले से अवगत कराया।
सूचना मिलते ही डॉग स्क्वाड, क्विक रिस्पांस टीम (QRT) और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचे और चप्पे-चप्पे की गहन तलाशी शुरू की गई।
हालांकि, प्राथमिक जांच और पिछले अनुभवों के आधार पर इस ईमेल के आईपी एड्रेस का सत्यापन किया जा रहा है, लेकिन सुरक्षा में कोई भी चूक न हो, इसके लिए पूरे परिसर को छावनी में बदल दिया गया है।
सुरक्षा और साइबर एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन अपराधियों का डिजिटल रूट है। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह धमकी भरे ईमेल किसी साधारण नेटवर्क से नहीं भेजे जा रहे हैं। अपराधी अपनी पहचान छुपाने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN), डार्क वेब (Dark Web) और पीर-टू-पीर एन्क्रिप्टेड ईमेल सर्विसेज (ProtonMail या अन्य विदेशी सर्वर) का इस्तेमाल कर रहे हैं।
जब भी साइबर पुलिस इनके आईपी एड्रेस को ट्रैक करने की कोशिश करती है, तो उसकी लोकेशन हर सेकंड में जर्मनी, रूस, स्विट्जरलैंड या किसी अन्य देश में दिखाई देती है। अंतरराष्ट्रीय सर्वर कंपनियों से डेटा मिलने में होने वाली कानूनी और तकनीकी देरी का फायदा उठाकर यह दहशतगर्द हर बार साफ बच निकलते हैं।
इस तरह की बार-बार मिलने वाली धमकियों का सबसे बड़ा और सीधा असर राजस्थान के आम जनजीवन और न्याय व्यवस्था पर पड़ रहा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते अक्टूबर 2025 से लेकर 2026 के चालू महीनों तक 12 से अधिक बार ऐसी झूठी धमकियां मिल चुकी हैं। हर बार जब ऐसी धमकी मिलती है, तो अदालतों में चल रही महत्वपूर्ण केसों की गवाही, बहस और फैसले टल जाते हैं।
दूर-दराज के गांवों से बसों और ट्रेनों में किराया लगाकर जयपुर या जोधपुर पहुंचने वाले गरीब मुवक्किलों को बिना सुनवाई के ही वापस लौटना पड़ता है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। वकीलों के संगठनों ने भी इस पर गहरी चिंता जताई है कि बार-बार कोर्ट की सुरक्षा को इस तरह से चुनौती देना कानून व्यवस्था के इकबाल पर एक बड़ा सवालिया निशान है।
खुफिया एजेंसियों के विशेषज्ञ इस बात का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं कि इन लगातार मिलने वाली धमकियों के पीछे का वास्तविक मोटिव क्या है। विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार इस तरह की फर्जी धमकियां देकर अपराधी सुरक्षा एजेंसियों को थकाना चाहते हैं, ताकि एजेंसियां हर बार इसे एक सामान्य रूटीन मानकर ढीली पड़ जाएं और इसी बीच किसी बड़ी अप्रिय घटना को अंजाम दिया जा सके।
दूसरा एंगल यह भी है कि राज्य की सबसे बड़ी कानूनी संस्था को निशाना बनाकर ये डिजिटल अपराधी केवल प्रशासनिक मशीनरी को उलझाए रखना चाहते हैं और समाज में एक अस्थिरता का माहौल पैदा करना चाहते हैं।
राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि अब समय आ गया है जब पुलिस को केवल ईमेल ट्रेस करने के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। कोर्ट परिसरों की फिजिकल सिक्योरिटी को पूरी तरह से फुलप्रूफ और एडवांस एआई-बेस्ड सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जाना चाहिए।
एंट्री गेट पर सख्त बायोमेट्रिक या स्कैनर चेकिंग अनिवार्य होनी चाहिए ताकि बिना पहचान पत्र के कोई भी संदिग्ध व्यक्ति अंदर न जा सके। जब तक इन डिजिटल दहशतगर्दों को जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक मरुधरा के इस सबसे बड़े न्याय के मंदिर पर मंडराता यह अदृश्य खतरा पूरी तरह से खत्म नहीं होगा।