जयपुर

पेपर लीक मामलों पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: भर्ती धांधली के 4 आरोपियों को बड़ा झटका, जमानत अर्जी खारिज

Kota Exam Paper Leak Case: राजस्थान हाईकोर्ट ने कोटा परीक्षा पेपर लीक और नकल मामले में चार आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराध भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और जनता के भरोसे को नुकसान पहुंचाते हैं।
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Aug 04, 2026
Rajasthan highcourt
AI जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर

Rajasthan Highcourt Order: हाईकोर्ट ने भर्ती परीक्षा में पेपर लीक व नकल को लेकर एक बार फिर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराध न केवल पात्र अभ्यर्थियों के हितों को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि सार्वजनिक भर्ती परीक्षा की चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सीधा हमला है। इससे सार्वजनिक परीक्षाओं में जनता का भरोसा कम होता है। कोर्ट ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना प्रशासन और जांच एजेंसियों की अहम जिम्मेदारी है। मामला केन्द्र सरकार की सेन्ट्रल कौंसिल फोर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंस (सीसीआरएएस) में मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) भर्ती से जुड़ा है जिसमें कोर्ट ने पेपर लीक व नकल कराने के चार आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया।

न्यायाधीश प्रमिल कुमार माथुर ने सूरज सिंह धनगर, सागर करुवान, गौरव कुमार मीना व मदन सिंह की जमानत याचिका खारिज करते यह आदेश दिया। आरोपियों के खिलाफ कोटा के आरकेपुरम थाने में 2025 में रिपोर्ट दर्ज हुई थी, जिसमें कहा था कि परीक्षा केंद्र से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों ने अभ्यर्थियों को हल किए गए उत्तर और अन्य नकल सामग्री मुहैया कराकर भर्ती परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित किया है।

कारण न बताने मात्र से जमानत का अधिकार नहीं

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपियों की भूमिका निष्क्रिय कर्मचारी की नहीं बल्कि सक्रिय साजिशकर्ता की है। कोर्ट ने माना कि सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और वित्तीय लेन-देन से प्रथम दृष्टया संलिप्तता साबित होती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के लिखित कारण न बताए जाने मात्र से जमानत का अधिकार नहीं बनता जब तक कि वास्तविक नुकसान या पूर्वाग्रह का आरोप प्रमाणित नहीं हो।

अभियोजन पक्ष ने कहा

अभियोजन पक्ष ने आरोपियों पर संगठित साजिश का आरोप लगाया। सुरज सिंह को क्लस्टर हेड और परीक्षा प्रभारी बताया गया जिसने परीक्षा केंद्र की वास्तविक स्थिति छिपाई। सागर करुवान ने मोबाइल के प्रयोग की अनुमति दी और सॉल्व्ड आंसर शीट बांटी। गौरव मीना को 50000 रुपए मिले और मदन सिंह परीक्षा केंद्र का पार्टनर था और पूरी व्यवस्था व सहयोग देने में शामिल रहा।

Updated on:
04 Aug 2026 09:50 am
Published on:
04 Aug 2026 09:50 am