पुलिस के अनुसार 28 सितंबर 2018 को बैंक के ऋण प्रभारी सादत अली ने मामला दर्ज कराया था। जांच में सामने आया कि बैंक की तत्कालीन अध्यक्षा डॉ. फिरोजा बानो, बैंक अधिकारियों, ऋणियों, गारंटरों व अधिवक्ताओं सहित कुल 59 आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र रचा। इन्होंने फर्जी हाउसिंग सोसायटियों के पट्टे और विवादित संपत्तियों के दस्तावेज गिरवी रखकर नियमों के खिलाफ 13 ऋण खाते स्वीकृत कराए और करोड़ों रुपए हड़प लिए। जांच में यह भी सामने आया कि लोन स्वीकृति के दौरान बैंक के निर्धारित नियमों और दस्तावेजों के सत्यापन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इसी का फायदा उठाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बड़ी राशि के ऋण स्वीकृत कराए गए। पुलिस का कहना है कि मामले में पहले भी कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और शेष फरार आरोपियों की तलाश लगातार जारी है।