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Rajasthan News : इंतज़ार होगा ख़त्म! घोषित होने वाली हैं पंचायत और निकाय चुनाव की तारीखें, जानें लेटेस्ट और बड़ी अपडेट

Rajasthan Election Controversy: "आयोग चुनाव नहीं करा सकता तो बताए, जज करवा देंगे..." राजस्थान हाई कोर्ट की बड़ी सख्ती, 20 जुलाई तक तारीखें तय करने और लॉटरी निकालने का अल्टीमेटम
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Jul 17, 2026
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Rajasthan Panchayat Municipal Election Update

राजस्थान में पिछले कई महीनों से लंबित चल रहे पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनावों को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। चुनाव कराने में लगातार हो रही देरी और प्रशासनिक ढिलाई पर गहरी नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए यहां तक कह दिया कि यदि जिम्मेदार एजेंसियां तय समय पर चुनाव कराने में असमर्थ हैं, तो हाई कोर्ट अपने स्तर पर जज नियुक्त करके चुनाव संपन्न करवा देगा।

हाई कोर्ट में हुई इस महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ किया कि चुनाव टालने की प्रक्रिया अब और बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को आगामी सोमवार (20 जुलाई 2026) तक चुनाव की तारीखों का रोडमैप तैयार करने, ओबीसी (OBC) आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने और आरक्षण की लॉटरी निकालने के सख्त निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले से जुड़े सभी जिम्मेदार अधिकारियों को पूरी जानकारी के साथ सोमवार को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का आदेश जारी किया है।

सरकार के प्रार्थना पत्र पर आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट। फाइल फोटो- पत्रिका

यह सख्त आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा दायर एक प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए दिया। दरअसल, राज्य सरकार ने कोर्ट में अर्जी लगाकर गुहार लगाई थी कि पूर्व विधायक संयम लोढ़ा व अन्य की याचिकाओं पर हाई कोर्ट ने पहले 31 जुलाई 2026 तक चुनाव कराने के आदेश जारी किए थे। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में ओबीसी राजनीतिक आरक्षण संबंधी रिपोर्ट तैयार न होने के कारण इस समयसीमा में चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं लग रहा है।

सरकार ने कोर्ट से आग्रह किया कि चुनाव कराने की इस डेडलाइन को 31 जुलाई से आगे बढ़ा दिया जाए, जिसे स्वीकार करने के बजाय कोर्ट ने अधिकारियों की क्लास लगा दी।

राज्य निर्वाचन आयुक्त ने स्वीकार की गलती

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से कोर्ट के समक्ष पेश हुए राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने चुनाव में हुई देरी को लेकर अदालत के सामने अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने अपनी मजबूरियां बताते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग की तरफ से ईवीएम की उपलब्धता से लेकर मतदाता सूचियां जारी करने तक की सभी तैयारियां 100% पूरी हैं।

देरी की वजह स्पष्ट करते हुए आयुक्त ने बताया कि पंचायती राज विभाग और स्वायत्त शासन विभाग की ओर से अब तक एससी (SC), एसटी (ST), ओबीसी (OBC) और महिला आरक्षण से जुड़ी आवश्यक जानकारी आयोग को उपलब्ध नहीं कराई गई है। इस डेटा को हासिल करने के लिए संबंधित विभागों को 6 बार आधिकारिक पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला।

आयोग ने कोर्ट को भरोसा दिया कि वे 14 अगस्त तक कागजी कार्यवाही पूरी कर लेंगे और 31 अगस्त तक अंतिम डेटा मिलने के बाद 2 दिन में चुनाव की घोषणा कर देंगे, जिसे अगले 90 दिन में संपन्न करा लिया जाएगा। हालांकि, कोर्ट ने इस लंबी समयसीमा को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया।

'3 महीने का आयोग 1 साल तक क्या कर रहा था?'

फाइल फोटो - AI

सुनवाई के दौरान जब ओबीसी (राजनीतिक) आयोग के सचिव अशोक जैन से कोर्ट ने पूछा कि इस आयोग का गठन कितने समय के लिए किया गया था, तो जवाब मिला कि मई 2025 में सिर्फ 3 महीने के लिए इसका गठन हुआ था। इस पर कोर्ट ने तीखी नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस काम को 3 महीने में पूरा होना था, उसे 1 साल से अधिक का समय बीत चुका है और आप लोग अब तक चुनाव कराने में नाकाम रहे हैं।

अदालत ने सख्त लहजे में पूछा...

Rajasthan Court : फाइल फोटो पत्रिका

'जब हाई कोर्ट ने पहले ही 31 जुलाई तक चुनाव कराने की तारीख तय कर रखी थी, तो ओबीसी आयोग ने कोर्ट से ऊपर जाकर अपने स्तर पर 14 अगस्त की नई तारीख कैसे तय कर ली? क्या ओबीसी की रिपोर्ट के बिना चुनाव संपन्न नहीं कराए जा सकते? आयोग हमें जुलाई के भीतर ही रिपोर्ट देने की अंतिम तारीख बताए, वरना जिम्मेदार अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी।'

14 हजार ग्राम पंचायतों, 300 निकायों में अटके हैं चुनाव

एआई तस्वीर

कोर्ट को प्रारंभिक आकलन की जानकारी देते हुए बताया गया कि प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कुल 4 चरणों में और नगरीय निकायों के चुनाव 2 चरणों में कराने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। ग्राम पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को पूरा करने में लगभग 50 दिन और नगरीय निकायों के चुनाव में करीब 40 दिन का समय लगेगा।

गौरतलब है कि राजस्थान की लगभग 14 हजार ग्राम पंचायतों और 300 से अधिक नगरीय निकायों में पिछले कई महीनों से निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म होने के बाद भी चुनाव लंबित हैं, जिससे स्थानीय विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

सोमवार को होगी अगली निर्णायक सुनवाई

हाई कोर्ट के इस बेहद आक्रामक रुख को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कोर्ट से इस मामले की सुनवाई को सोमवार तक स्थगित करने का विशेष आग्रह किया, ताकि सरकार अपना ठोस पक्ष और तारीखों का प्लान तैयार कर सके।

याचिकाकर्ता संयम लोढ़ा के अधिवक्ता पुनीत सिंघवी ने भी इस पर अपनी मौन सहमति दी। अब कोर्ट इस मामले से जुड़ी सभी मूल याचिकाओं और सरकार के खिलाफ दायर अवमानना याचिकाओं पर सोमवार (20 जुलाई 2026) को एक साथ संयुक्त सुनवाई करेगा, जिसमें राजस्थान के स्थानीय चुनावों का अंतिम भविष्य तय होगा।

Updated on:
17 Jul 2026 09:40 am
Published on:
17 Jul 2026 09:40 am