
Rajasthan Congress V/S BJP - File PIC
राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव 2028 को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस पार्टी ने राज्य के सबसे बड़े और निर्णायक अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) वोट बैंक को अपने पाले में लाने के लिए बड़ा राजनीतिक दांव चल दिया है। जयपुर में गुरुवार को आयोजित हुई 'राजस्थान ओबीसी कांग्रेस एडवाइजरी काउंसिल' की महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश के भीतर ओबीसी वर्ग का आरक्षण वर्तमान 21 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने के ऐतिहासिक प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से मुहर लगा दी गई है। इसके साथ ही कांग्रेस संगठन में आबादी के अनुपात के आधार पर ओबीसी समाज को प्रतिनिधित्व और बड़ी जिम्मेदारियां देने की मांग पर भी पूरी तरह से सहमति बनी है।
राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में करीब 5 घंटे तक चली इस मीटिंग में पारित किए गए सभी प्रस्तावों को अब अंतिम मंजूरी के लिए नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के आलाकमान के पास भेजा जाएगा, जिससे राज्य की राजनीति में एक बार फिर आरक्षण का मुद्दा गरमा गया है।
जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) में काउंसिल के संयोजक हरसहाय यादव की अध्यक्षता में यह विशेष मीटिंग बुलाई गई थी, जिसका मुख्य एजेंडा आगामी चुनावों में ओबीसी वर्ग की भागीदारी को मजबूत करना था।
इस महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस के ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, विधायक मनीष यादव, रफीक खान सहित कई मौजूदा विधायक, पूर्व विधायक और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। काउंसिल के कुल 66 सदस्यों में से 56 सदस्य इस मीटिंग में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे और अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
हालांकि, राजस्थान कांग्रेस के दो सबसे बड़े चेहरे, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट पहले से तय कुछ जरूरी कार्यक्रमों और व्यस्तताओं के कारण इस बैठक में शामिल नहीं हो सके।
5 घंटे से भी अधिक समय तक चले गहन मंथन के दौरान उपस्थित सभी 56 नेताओं ने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया कि राज्य की राजनीति और विकास में ओबीसी हितों से जुड़े मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
बैठक के दौरान सर्वसम्मति से जो प्रमुख सिफारिशें की गईं, वे इस प्रकार हैं:
संगठन में बड़े पद: कांग्रेस संगठन के भीतर जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक के सभी बड़े और महत्वपूर्ण पदों पर ओबीसी नेताओं को अधिक से अधिक जिम्मेदारियां सौंपी जाएं।
टिकट वितरण में हिस्सेदारी: आगामी चुनावों में टिकटों के बंटवारे के दौरान ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों की हिस्सेदारी को आबादी के अनुसार काफी बढ़ाया जाए।
ओबीसी महिलाओं को आरक्षण: देश और प्रदेश में भविष्य में जब भी महिला आरक्षण लागू किया जाए, तो उसमें ओबीसी वर्ग की महिलाओं को भी उनके तय अनुपात के मुताबिक अलग से उचित प्रतिनिधित्व की गारंटी दी जाए।
संभाग स्तर पर काउंसिल: राज्य स्तर की तर्ज पर ही अब राजस्थान के सभी संभाग स्तर पर भी 'ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल' का गठन जल्द से जल्द किया जाए ताकि जमीनी स्तर पर फीडबैक मिल सके।
कांग्रेस के ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल जयहिंद ने केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा और जातिगत जनगणना के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना केवल समाज के लोगों की संख्या या सिरों को गिनने का एक साधारण माध्यम नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके जरिए यह पूरी तरह से स्पष्ट और पारदर्शी होना चाहिए कि ओबीसी वर्ग की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक भागीदारी असल में कितनी है।
जयहिंद ने राहुल गांधी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके विशेष आग्रह और विजन के कारण ही तेलंगाना में सफलता के साथ जातिगत जनगणना कराई गई थी, जिसके बाद अब केंद्र सरकार ने भी दबाव में आकर इसे स्वीकार तो कर लिया है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया को जितनी गति मिलनी चाहिए थी, वह अपेक्षित गति नहीं दी जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी आबादी के असली अनुपात में सही प्रतिनिधित्व नहीं मिलने के कारण ओबीसी वर्ग का लगातार शोषण हो रहा है, जिसे कांग्रेस अब सहन नहीं करेगी।
ओबीसी एडवाइजरी काउंसिल के संयोजक हरसहाय यादव ने बताया कि बैठक में आए सभी 56 सदस्यों के लिखित और मौखिक सुझावों को बहुत ही बारीकी से इस फाइनल ड्राफ्ट में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि 21 से बढ़ाकर 27 फीसदी आरक्षण करने और संगठन में बड़ी भूमिका देने का यह ऐतिहासिक प्रस्ताव पूरी तरह से सर्वसम्मति से पास हुआ है, जिसे बहुत जल्द दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) को सौंप दिया जाएगा ताकि आगामी 2028 के रोडमैप पर काम शुरू किया जा सके।
राजस्थान में आगामी 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस ने ओबीसी आरक्षण को 21% से बढ़ाकर 27% करने का जो प्रस्ताव पास किया है, उसे राजनीतिक गलियारों में बीजेपी को शिकस्त देने और सत्ता में वापसी का एक बड़ा 'मास्टर स्ट्रोक' माना जा रहा है। बता दें कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सबसे बड़ा और निर्णायक वोट बैंक है, इसलिए कांग्रेस इस दांव के जरिए इस बड़े वर्ग को पूरी तरह अपने पाले में लामबंद करना चाहती है।
यदि दिल्ली में एआईसीसी (AICC) से इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है और पार्टी आगामी चुनावों में टिकट वितरण से लेकर संगठन तक में आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी देने के अपने वादे पर मजबूती से आगे बढ़ती है, तो यह सोशल इंजीनियरिंग बीजेपी के मजबूत पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकती है।
हालांकि, यह रणनीति जमीनी स्तर पर कितनी कारगर होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कांग्रेस अंदरूनी गुटबाजी से ऊपर उठकर इस विजन को आम जनता तक कैसे पहुंचाती है और सत्ताधारी बीजेपी इस बड़े जातीय कार्ड का क्या तोड़ निकालती है।
Updated on:
17 Jul 2026 10:53 am
Published on:
17 Jul 2026 10:53 am
