
Rajasthan Cancer : ग्राफिक्स फोटो पत्रिका।
Rajasthan Cancer : कैंसर अब उम्रदराज लोगों की बीमारी नहीं रह गया है। परिवार का कोई सदस्य इलाज के लिए एसएमएस, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट या किसी निजी अस्पताल पहुंचता है तो उसके साथ पूरा परिवार मानसिक, सामाजिक और आर्थिक संकट से गुजरता है। चिंताजनक हालात के बीच चुनौतियों को पार कर अर्ली डिटेक्शन के बाद सफल उपचार और सुखी जीवन जी रहे लोगों की कहानियां भी है। यानि, साफ है.. जल्द पहचान से कैंसर को पूरी तरह हराया जा सकता है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय कैसर रजिस्ट्री कार्यक्रम के अनुसार देश में 2025 में करीब 15.7 लाख नए कैंसर मरीज सामने आने का अनुमान है। यानी औसतन प्रतिदिन 4,300 से अधिक लोग कैंसर की चपेट में आ रहे है। प्रदेश में हर वर्ष 40 से 45 हजार नए कैंसर मरीज सामने आते हैं। राजस्थान में एकीकृत कैंसर रजिस्ट्री शुरू करने की तैयारी भी इसी को देखते हुए की जा रही है, ताकि वास्तविक जिलेवार तस्वीर सामने आ सके।
हाल ही जारी ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन कैंसर 2026 के अनुसार दुनिया में हर वर्ष लगभग 2.06 करोड़ नए कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। वर्ष 2050 तक 3.5 करोड़ नए मामलों का अनुमान है। यानी हर पांचवां व्यक्ति जीवनकाल में कैंसर से प्रभावित होगा। वहीं इलाज का बड़ा सहारा जयपुर बन रहा है।
1- जयपुर की 35 साल की युवती की पहचान हुई। अर्ली डिटेक्शन से उसका कैंसर का इलाज पूरी तरह सफल रहा। आज वह सफल वैवाहिक जीवन जी रही है।
2- टोंक जिले की निवासी 70 साल की महिला को 10 वर्ष पहले शुरुआती स्तर पर ब्लड कैंसर की पहचान हुई। इलाज के बाद कुछ दवाइयों के सहारे वह सुखी जीवन जी रही है।
पुरुष : मुंह, फेफड़ों, ब्लड, भोजन नली के कैंसर।
महिलाएं : स्तन और गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल)।
दोनों में : कोलोरेक्टल और रक्त संबंधी कैंसर प्रमुख जरूरतें।
मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, प्रदूषण और बदलती जीवनशैली नए जोखिम कारक।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और शुरुआती जांच की कमी। देर से अस्पताल पहुंचते हैं मरीज।
1- कैंसर से सबसे बड़ी जीत, शुरुआती जांच।
2- तंबाकू नियंत्रण से एक-तिहाई कैंसर रोके जा सकते हैं।
3- स्क्रीनिंग बढ़ाने की जरूरत।
4- जिला स्तर तक कैंसर रजिस्ट्री विकसित करनी होगी।
5- इलाज के साथ-साथ सर्वाइवर के जीवन की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा।
अधिकांश मरीज तीसरे या चौथे चरण में अस्पताल पहुंचते हैं। स्तन, गर्भाशय ग्रीवा, मुंह और बड़ी आंत जैसे कैंसर की शुरुआती अवस्था में पहचान हो जाए तो उपचार की सफलता कई गुना बढ़ जाती है। पॉपुलेशन बेस कैंसर रजिस्ट्री (पीबीसीआर) सभी नए कैंसर मामलों का वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार करती है। इसके आधार पर उपचार सुविधाओं की बेहतर योजना बनाई जा सकती है।
डॉ. संदीप जसूजा, अधीक्षक, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट
Updated on:
17 Jul 2026 09:58 am
Published on:
17 Jul 2026 09:53 am
