
Janana Hospital Chandpol: अंधेरे में काम करते हुए कर्मचारी व पंखा करते हुए मरीज के परिजन। फोटो पत्रिका
Jaipur : जयपुर के चांदपोल स्थित जनाना अस्पताल में गुरुवार को करीब चार घंटे तक बिजली गुल रहने से चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। एनआइसीयू के बाहर लगे बिजली पैनल में शॉर्ट सर्किट के बाद अस्पताल का बड़ा हिस्सा अंधेरे में डूब गया। बिजली संकट का असर ओपीडी-आइपीडी से लेकर आइसीयू, एनआइसीयू, नर्सरी, ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम, ब्लड बैंक, ड्रग स्टोर और जांच सेवाओं तक दिखाई दिया। सबसे अधिक परेशानी वार्डों में भर्ती प्रसूताओं, गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को उठानी पड़ी।
सुबह करीब 10.30 बजे बिजली आपूर्ति अचानक ठप हुई तो अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। ओपीडी में मरीजों की कतारें थम गई, जांचों की बिलिंग बंद हो गई और कई मरीजों की जांचें बीच में ही अटक गई। बिजली संकट के चलते अस्पताल में होने वाली इलेक्टिव (रुटीन) सर्जरी टालनी पड़ी, जबकि डॉक्टरों ने आपातकालीन मरीजों को सीमित संसाधनों के सहारे संभाला गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि ब्लड बैंक में रखे रक्त को सुरक्षित रखने के लिए जेके लोन अस्पताल जयपुर और महिला चिकित्सालय भेजने की तैयारी करनी पड़ी। हालांकि कुछ देर बाद बैकअप बिजली मिलने से उसकी जरूरत नहीं पड़ी। लाइफ लाइन मेडिकेयर ड्रग स्टोर सहित कई जरूरी सेवाओं का संचालन भी प्रभावित रहा।
एनआइसीयू और नर्सरी के बाहर गंभीर हालात देखने को मिले। बिजली गुल होने से वार्डों में गर्मी और उमस बढ़ गई। भर्ती नवजातों के परिजन हाथ से पंखा झलते नजर आए। प्रसूताओं और गर्भवती महिलाओं को भी भीषण गर्मी और घुटन के बीच घंटों इंतजार करना पड़ा। डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ लगातार मरीजों की निगरानी में जुटे रहे, लेकिन बिजली संकट के कारण पूरे अस्पताल में बेचैनी और चिंता का माहौल बना रहा।
प्रदेश के सबसे बड़े महिला अस्पताल में चार घंटे तक बिजली संकट ने बैकअप व्यवस्था की तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों और परिजनों का कहना था कि यदि तकनीकी खराबी और लंबी चलती तो हालात और बिगड़ सकते थे।
बिजली गुल का असर ऑपरेशन थिएटर और लेबर रूम पर भी पड़ा। निर्धारित समय पर कई ऑपरेशन शुरू नहीं हो सके। रुटीन ऑपरेशन टाले भी गए। ओटी के बाहर मरीजों के परिजनों की भीड़ लगी रही। कई लोगों ने आरोप लगाया कि घंटों इंतजार करना पड़ा। एक प्रसूता ने बताया कि वार्ड में गर्मी इतनी अधिक थी कि उसे कॉरिडोर में बैठना पड़ा।
बिजली बाधित होने से कई लिफ्ट भी बंद रहीं, जिससे गर्भवती महिलाओं और बुजुर्ग मरीजों को सीढ़ियों से आना-जाना पड़ा। कई लोग मोबाइल की टॉर्च जलाकर अस्पताल के विभिन्न विभागों तक पहुंचते दिखाई दिए।
एनआइसीयू के बाहर बिजली पैनल में तकनीकी खराबी के कारण एक फेज की बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई थी। इमरजेंसी सेवाएं जनरेटर और यूपीएस से संचालित होती रहीं। एक ऑपरेशन थिएटर प्रभावित हुआ था। इंजीनियरिंग टीम ने मरम्मत कर चरणबद्ध तरीके से बिजली आपूर्ति बहाल कर दी। ब्लड बैंक सहित अन्य सेवाओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार कर ली गई थी, लेकिन उसकी जरूरत नहीं पड़ी।
डॉ. नूपुर लोरिया, अधीक्षक, जनाना अस्पताल
Updated on:
17 Jul 2026 10:56 am
Published on:
17 Jul 2026 10:51 am
