
Rajasthan Highways : राजस्थान में सड़कों पर दौड़ रहे ट्रक, बस सहित तेज रफ्तार एसयूवी और कारें जानलेवा होती जा रही हैं। सबसे ज्यादा खौफ नेशनल और स्टेट हाईवे पर है। वर्ष 2024 में हाईवे पर हुए हादसों में 6,260 लोगों की मौत हो गई। इनमें अकेले नेशनल हाईवे पर 3,929 और स्टेट हाईवे पर 2,221 लोगों ने दम तोड़ दिया। एक्सप्रेस-वे पर भी 110 लोगों की जान चली गई। राजधानी जयपुर में हाईवे हादसों में 379 लोगों की मौत हुई। जिनमें 313 मौतें नेशनल हाईवे, 40 स्टेट हाईवे और 26 एक्सप्रेस-वे पर हुईं।
राजस्थान में कार और एसयूवी की टक्कर से 2,477 लोगों की जान गई, जबकि ट्रकों ने 920 लोगों को कुचल दिया। बसों की चपेट में आने से 299 लोगों की मौत हुई। ये आंकड़े बताते हैं कि हाईवे पर तेज रफ्तार, भारी वाहनों का दबाव और लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं रफ्तार और चालक के नशा कर वाहन चलाने पर हो रही हैं और प्रदेश में 11 वर्ष 6 माह में 1.24 लाख लोग सड़कों पर जान गंवा चुके हैं।
प्रदेश में नेशनल हाई-वे का विस्तार हुआ है, पर ये ही सबसे अधिक जानलेवा साबित हुए। यहां 6,756 सड़क हादसे हुए, जिनमें 6,334 लोग घायल और 3,929 लोगों की मौत हो गई। स्टेट हाई-वे पर 4,218 हादसों में 3,994 लोग घायल हुए और 2,221 लोगों ने जान गंवाई। एक्सप्रेस-वे पर हादसों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन 136 हादसों में 110 मौतें हुईं।
राजधानी जयपुर से निकल रहे हाई-वे सुरक्षित नहीं रहे। नेशनल हाईवे पर 713 हादसे, 600 घायल और 313 मौतें हुईं। वहीं स्टेट हाई-वे पर 113 हादसों में 91 लोग घायल हुए और 40 लोगों की मौत हुई। एक्सप्रेस-वे पर 41 हादसों में 34 लोग घायल हुए, जबकि 26 लोगों की जान चली गई।
हाईवे पर ओवरस्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाना, थकान के बावजूद लंबी दूरी तक ड्राइविंग और सीट बेल्ट व हेलमेट जैसे सुरक्षा नियमों की वजह बन रही है। समय पर सहायता नहीं मिलने से भी मौतों का आंकड़ा बढ़ जाता है।
प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार अभियान चलाए जा रहे है, लेकिन इसके बावजूद दुर्घटनाओं में अपेक्षित कमी नहीं आ रही। ब्लैक स्पॉट पर सुधार कार्य किए जा रहे है, फिर भी हाईवे पर अनुशासन की कमी गंभीर चुनौती बनी हुई है।