Rajasthan : राजस्थान में दो से ज्यादा बच्चे वाले नेताओं के पार्षद, मेयर, नगरपालिका अध्यक्ष, सभापति बनने पर लगी रोक हटाने वाला राजस्थान नगरपालिका संशोधन विधेयक मंगलवार को विधानसभा से पारित हो गया। पर इसके बाद विपक्ष अचानक मुखर हो गया, उसने विधानसभा में मांग की कि भर्ती व सरकारी योजनाओं से भी यह पाबंदी हटे।
Rajasthan : राजस्थान में दो से ज्यादा बच्चे वाले नेताओं के पार्षद, मेयर, नगरपालिका अध्यक्ष, सभापति बनने पर लगी रोक हटाने वाला राजस्थान नगरपालिका संशोधन विधेयक मंगलवार को विधानसभा से पारित हो गया। विपक्ष के सदस्यों ने विधेयक पर चर्चा के दौरान राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि दो बच्चों की बाध्यता हटाई जा रही है, लेकिन नगरीय निकायों के चुनाव नहीं करवाए जा रहे।
नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राज्य ओबीसी आयोग के अधिकृत आंकड़े पेश किए बिना ओबीसी आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता।
इसी दौरान कांग्रेस के गोविन्द सिंह डोटासरा ने राजस्थान पत्रिका में मंगलवार को चुनाव लड़ने में छूट… भर्ती और संबल योजनाओं में रोक… शीर्षक से प्रकाशित समाचार के आधार पर सरकार से सवाल किया कि क्या दो बच्चों की बाध्यता चुनाव के लिए हटाई जा रही है, क्या भर्ती और केंन्द्र व राज्य सरकार की योजनाओं से भी यह शर्त हटाई जाएगी। कांग्रेस के नरेन्द्र बुड़ानियां और बहुजन समाज पार्टी के मनोज कुमार ने भी यह मुद्दा उठाया।
विपक्ष के आपत्ति जताने से हंगामे जैसी स्थिति बनने पर झाबर सिंह खर्रा ने कहा, बिना ओबीसी आरक्षण चुनाव कराना चाहते हैं तो आप प्रस्ताव दो, हम कल ही अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना पत्र पेश कर देंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली के बिल के साथ यूडी टैक्स वसूलने का कोई आदेश जारी नहीं किया, वहीं यदि राजस्व रिकॉर्ड में किसी संस्था के नाम भूमि दर्ज है तो ही उस पर विधायक कोष की राशि खर्च हो सकेगी।
कांग्रेस के गोविंद सिंह डोटासरा ने विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि सरकार पंचायतों के लिए ओबीसी आयोग को डेटा नहीं दे रही, कभी आयोग को गाड़ी-पैन, स्टेशनरी नहीं दी।
ओबीसी आयोग को पंगु बना दिया, राज्य निर्वाचन आयोग को भी कठपुतली बना दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रेल तक चुनाव करवाने का फैसला दिया। चुनाव टालने के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का बहाना बना रहे।