राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच ने राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का बाघ अभयारण्य के पास आरक्षित वन भूमि पर अवैध खनन के आरोपों की जांच एक संयुक्त समिति से कराने के आदेश दिए हैं।
Illegal mining in Sariska Tiger Reserve: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सेंट्रल जोन बेंच ने राजस्थान के अलवर जिले में सरिस्का बाघ अभयारण्य के पास आरक्षित वन भूमि पर अवैध खनन के आरोपों की जांच एक संयुक्त समिति से कराने के आदेश दिए हैं। न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की बेंच ने क्षेत्र में पर्यावरण संबंधी चिंताओं को लेकर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान ये निर्देश जारी किए। आदेश के अनुसार, एक संयुक्त समिति का गठन किया गया है जिसमें प्रमुख मुख्य वन संरक्षक, खान एवं भूविज्ञान विभाग और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल हैं।
आदेश में कहा गया है कि आरपीसीबी समन्वय और रसद के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। समिति को कार्यस्थल का दौरा करने और छह सप्ताह के भीतर एक तथ्यात्मक और कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई आगामी 7 अक्टूबर को होगी।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक निजी खनिक थानागाजी तहसील के झिरी गांव में खनन पट्टा संख्या 258/89 की स्वीकृत सीमा से आगे काम कर रहा था और उसने प्रतापगढ़ तहसील के अंतर्गत आने वाले खसरा संख्या 1116 में 1,876 वर्ग मीटर आरक्षित वन भूमि पर अतिक्रमण किया था। यह क्षेत्र सरिस्का टाइगर रिजर्व के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र के निकट स्थित है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में खननकर्ता ने खनन गतिविधियां अनिवार्य पर्यावरणीय मंज़ूरी, संचालन की सहमति और वन्यजीव मंज़ूरी का उल्लंघन कर की जा रही हैं। जिसके कारण वन्यजीव आवासों को भारी नुकसान हो रहा है।
एक संयुक्त विभागीय सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार वन भूमि पर अवैध खनन की पुष्टि हुई है। न्यायाधिकरण ने कहा कि यह वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा 2 और टी.एन. गोदावर्मन मामले में सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का उल्लंघन करता है। मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए, न्यायाधिकरण ने प्रतिवादियों की सूची का पुनर्गठन किया।