
Iran–Israel Conflict Impact In Rajasthan: ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव का असर राजस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण पर तेजी से दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला डामर पिछले तीन माह में करीब दोगुना महंगा हो गया है। मार्च में 45 हजार रुपए प्रति टन मिलने वाला डामर अब भी 85 हजार रुपए प्रति टन है। इससे प्रदेश में 5 हजार करोड़ रुपए से अधिक के सड़क निर्माण, मरम्मत और डामरीकरण कार्य प्रभावित हो गए हैं। राजधानी जयपुर सहित अधिकांश जिलों में सड़क परियोजनाओं की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जबकि कई काम पूरी तरह अटक गए हैं।
शहरों की अंदरुनी सड़कों से लेकर हाईवे के बड़े प्रोजेक्ट प्रभावित हैं। अनुबंधित कंपनियों ने ज्यादातर जगह काम बंद कर सरकार से अतिरिक्त प्राइस एस्केलेशन मांग रहे है। इसके लिए एनएचएआई का हवाला दे रहे हैं। सार्वजनिक निर्माण विभाग, जयपुर विकास प्राधिकरण से लेकर प्रदेश के नगरीय निकाय, नगर विकास न्यास ऐसे हालात को संभाल नहीं पा रहे हैं।
अनुबंध शर्तों में देरी होने पर अधिकतम 10 प्रतिशत तक पेनल्टी का प्रावधान है, लेकिन डामर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से परियोजनाओं की लागत 50 से 80 प्रतिशत तक बढ़ गई है। ऐसे में कई ठेकेदार पेनल्टी भुगतना मंजूर कर रहे हैं, लेकिन बढ़ी हुई लागत पर काम करने को तैयार नहीं हैं। एजेंसियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रोजेक्ट को तय दर पर पूरा करना संभव नहीं है।
प्रदेश में हर साल मानसून पूर्व सड़क मरम्मत और डामरीकरण का बड़ा अभियान चलाया जाता रहा है। इसी अवधि में सड़क निर्माण और रिपेयर के सबसे ज्यादा कार्य होते हैं, लेकिन इस बार चिंता बढ़ा दी है। यदि जल्द राहत नहीं मिली तो बरसात के दौरान सड़कों की स्थिति और अधिक खराब हो सकती है।
असर अब नई निविदाओं पर भी दिखाई देने लगा है। कई निर्माण कंपनियां बढ़ती लागत और अनिश्चित बाजार परिस्थितियों के कारण नए टेंडर लेने से बच रही हैं। वहीं, पहले से स्वीकृत परियोजनाओं में भी काम की गति धीमी कर दी गई है।
वैश्विक संकट के चलते डामर की रेट बढी है, जिसके चलते कई जगह काम रुका है। उम्मीद है जल्द संकट दूर होगा। जनहित में जो भी काम करना है, वह करेंगे।
-रवि जैन, सचिव, स्वायत्त शासन विभाग