जयपुर

Rajasthan: रेत माफिया से मिलीभगत मामले में IPS माधव उपाध्याय पर कसा शिकंजा, विजिलेंस को सौंपी गई जांच रिपोर्ट

भीलवाड़ा में तैनात रहे IPS माधव उपाध्याय पर शिकंजा कस गया है। रेत और गारनेट माफिया से मिलीभगत के आरोपों की विजिलेंस जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को सौंप दी गई है। जानें क्या है पूरा मामला और आगे क्या कार्रवाई हो सकती है?

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Apr 21, 2026
IPS Madhav Upadhyay

जयपुर। राजस्थान में रेत माफिया और पुलिस के कथित गठजोड़ के मामले में अब कार्रवाई का दायरा और सख्त होता नजर आ रहा है। भीलवाड़ा में पोस्टिंग के दौरान विवादों में आए प्रोबेशनर आईपीएस माधव उपाध्याय को लेकर जांच ने नया मोड़ ले लिया है। इस पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट अब पुलिस मुख्यालय की विजिलेंस विंग को सौंप दी गई है, जहां हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में रेत माफिया और संदिग्ध कारोबारियों के साथ मिलीभगत के संकेत मिले हैं। हालांकि अभी अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है, लेकिन रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों ने पुलिस महकमे में हलचल जरूर बढ़ा दी है। इस मामले में अंतिम फैसला डीजीपी स्तर पर होना है, जो उनके बाड़मेर दौरे से लौटने के बाद प्रस्तावित उच्च स्तरीय बैठक में लिया जाएगा।

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ऐसे सामने आया आइपीएस का नाम

दरअसल, यह मामला भीलवाड़ा के कोटड़ी इलाके में गारनेट जैसे बहुमूल्य खनिज के अवैध खनन और परिवहन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस अवैध कारोबार को संरक्षण देने के बदले मोटी रकम वसूली जा रही थी। इसी सिलसिले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनसे पूछताछ के दौरान आईपीएस माधव उपाध्याय का नाम सामने आया। इसके बाद राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें एपीओ कर दिया और मामले की जांच अजमेर जीआरपी के एसपी को सौंपी गई।

दोबारा जांच के हो सकते हैं आदेश

जांच एजेंसियां अब यह भी खंगाल रही हैं कि अवैध वसूली का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। विजिलेंस विंग को सौंपी गई रिपोर्ट में कई अहम बिंदुओं को शामिल किया गया है, जिनकी गहन जांच जारी है। संभावना जताई जा रही है कि कुछ तथ्यों की पुष्टि के लिए दोबारा जांच के आदेश भी दिए जा सकते हैं।

कानूनी एक्शन की संभावना

एडीजी विजिलेंस एस. सेंगाथिर ने पुष्टि की है कि रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और उसका परीक्षण किया जा रहा है। इसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं।

डीजीपी के फैसले पर नजर

यह मामला सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कानून-व्यवस्था और सिस्टम की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलता है और क्या सरकार 'जीरो टॉलरेंस' की नीति पर खरा उतरते हुए ठोस कार्रवाई करती है।

'जांच रिपोर्ट प्राप्त हो गई है और उसका परीक्षण जारी है। इसके आधार पर ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।' -एस. सेंगाथिर, एडीजी विजिलेंस, राजस्थान पुलिस

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Published on:
21 Apr 2026 10:17 pm
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