जयपुर

Jaipur : सोना-चांदी आयात पर बड़ा फैसला, IGST छूट खत्म, अब बढ़ सकती हैं ज्वैलर्स की मुश्किलें

Jaipur : जयपुर में ज्वैलर्स एसोसिएशन के पूर्व महासचिव नीरज लूणावत का कहना है कि जो बुलियन डीलर बैंक या अधिकृत एजेंसी से आयातित सोना-चांदी खरीदते हैं, उन्हें सप्लाई चैन में अतिरिक्त कर का भुगतान करना पड़ेगा।
2 min read
rajasthan jewelers may face difficulties gold silver imports big decision
Rajasthan : फाइल फोटो पत्रिका

Jaipur : जयपुर. भारत में सोना-चांदी आयात करने वाले बैंकों और अधिकृत एजेंसियों के लिए अब लागत बढ़ने वाली है। जीएसटी परिषद ने सोना, चांदी और प्लैटिनम के आयात पर मिलने वाली एकीकृत जीएसटी (आइजीएसटी) की छूट समाप्त कर दी है। इससे इन धातुओं के आयात पर 3 फीसदी आइजीएसटी लगेगा। सरकार के इस फैसले का असर बुलियन कारोबार से जुड़े आयातकों और ज्वैलरी उद्योग पर पड़ सकता है।

राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव के अनुसार सरकार ने 31 मार्च के बाद इस छूट को आगे नहीं बढ़ाया। नया प्रावधान 1 अप्रैल से लागू किया गया था और जीएसटी परिषद को गुरुवार की बैठक में इसकी जानकारी दी गई।

सरकार का तर्क

सरकार का तर्क है कि आयात के अलग-अलग रास्तों पर कर व्यवस्था समान होनी चाहिए, ताकि किसी एक माध्यम को कर के लिहाज से प्राथमिकता न मिले। हालांकि, इस फैसले से आयातकों की कार्यशील पूंजी की जरूरत बढ़ेगी। यानी कारोबारियों को माल मंगाने के लिए पहले की तुलना में अधिक पैसा लगाना पड़ेगा।

इस फैसले से क्या बदलेगा?

1- बैंकों और अधिकृत एजेंसियों प्लैटिनम आयात करने पर अब यह कर देना होगा।
2- आयात के समय अतिरिक्त कर चुकाने से कारोबारियों की रकम अधिक समय तक अटक सकती है।
3- सरकार का उद्देश्य आयात के अलग-अलग माध्यमों के बीच कर संबंधी अंतर समाप्त करना है। गौरतलब है पहले इन आयातों को आइजीएसटी से राहत मिलती थी। सोने के लिए यह व्यवस्था 2017 में शुरू हुई थी, जिसे बाद में चांदी और प्लैटिनम तक बढ़ाया गया।

अतिरिक्त कर का भुगतान

ज्वैलर्स एसोसिएशन के पूर्व महासचिव नीरज लूणावत का कहना है कि जो बुलियन डीलर बैंक या अधिकृत एजेंसी से आयातित सोना-चांदी खरीदते हैं, उन्हें सप्लाई चैन में अतिरिक्त कर का भुगतान करना पड़ेगा। इससे कीमत सीधेतौर पर 3 प्रतिशत नहीं बढ़ेगी, लेकिन आइजीएसटी का इनपुट टैक्स क्रेडिट कब मिलता है, इस बात का असर होगा।

रखना होता है स्टॉक

जेम्स-ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल के रीजनल मेंबर डॉ संजय जोशी का कहना है कि नवरात्र से दिवाली तक त्योहारी सीजन और फिर शादियों के सीजन में सोने-चांदी की मांग बढ़ती है। ऐसे समय में ज्वैलर्स को ज्यादा स्टॉक रखना पड़ता है। यदि बुलियन की सप्लाई में अतिरिक्त पूंजी फंसती है, तो छोटे कारोबारियों के लिए मांग के अनुरूप स्टॉक जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

कारोबार पर क्या होगा असर

भारत दुनिया के बड़े सोना-चांदी बाजारों में शामिल है और अपनी मांग का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। देश में सोने का आयात नियंत्रित व्यवस्था के तहत होता है। बैंक और अधिकृत एजेंसियां इसकी आपूर्ति के प्रमुख माध्यम हैं। पात्र ज्वैलर्स इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज के जरिए भी आयात कर सकते हैं।

Updated on:
10 Oct 2026 03:30 pm
Published on:
10 Oct 2026 03:30 pm