Rajasthan Mines : खान विभाग ने खानों को बंद होने से बचाने को लेकर खान संचालकों को पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र जल्द दिलाने को लेकर सतर्कता बढ़ाई है।
Rajasthan Mines : जयपुर। राजस्थान के 25 हजार खान संचालकों को राज्य स्तरीय एनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी से पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने में हो रही देरी के चलते खनन बंद होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। पांच हेक्टेयर तक की यह खानें पुराने नियमों के तहत डिस्ट्रिक्ट लेवल एनवायरमेंट इंपैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी से पर्यावरण स्वीकृति लेकर चल रही थी। लेकिन, एनजीटी ने इन सभी खानों को राज्य स्तरीय कमेटी से पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य कर दिया है।
बताया जा रहा है कि पहले 28 अप्रेल 2024 तक सभी खानों को पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना था, लेकिन पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं होने के चलते विभाग ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) से इसकी अवधि 27 अक्टूबर तक बढ़वा ली। अभी तक आवेदन का ही काम चल रहा है।
खान विभाग ने खानों को बंद होने से बचाने को लेकर खान संचालकों को पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र जल्द दिलाने को लेकर सतर्कता बढ़ाई है। इसके लिए खान सचिव आनन्दी ने सभी अधिकारियों को प्रमाण पत्र लेने के लिए परिवेश पोर्टल पर फार्म-2 अपलोड कराने में मदद करने के लिए कहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय समिति से पर्यावरण स्वीकृतियां जारी कराने का कार्य विभाग मिशन मोड़ पर करेगा। उन्होंने अधिकारियों को कहा है कि खान धारकों से फार्म 2 अपलोड कराने का काम 31 मई तक पूरा कराएं। खान संचालकों को भी कहा है कि वे अपने स्तर पर भी परिवेश पोर्टल पर फार्म 2 अपलोड कराएं। ताकि तय समय सीमा में पर्यावरण अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी हो सके।
प्रदेश में 15 जनवरी 2016 से 13 सितंबर 2018 तक 25121 छोटी खानों और क्वारी लाइसेंस धारकों को जिला स्तरीय समिति की ओर से पर्यावरण स्वीकृति जारी की गई थी। एनजीटी ने जयंत कुमार के प्रकरण में निर्णय पारित कर इस तरह की समस्त स्वीकृतियों का पुनर्मूल्यांकन राज्य स्तरीय समिति द्वारा कराए जाने के निर्देश दिए थे।