
जयपुर। मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) के लिहाज से देश के सबसे फिसड्डी राज्यों में शामिल राजस्थान हालिया रिपोर्ट में 45 अंकों का सुधार कर पाया है। प्रदेश की मातृ मृत्यु दर अब 244 से घटकर 199 के पर पहुंच गई। जबकि उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड सुधार में 84 अंकों की लंबी छलांग के साथ 285 से 201 तक पहुंच गया है।
गौरतलब है कि राजस्थान पहले से ही शिशु और मातृ मृत्यु दर के लिहाज से देश के फिसड्डी राज्यों में है। केन्द्र की ओर से किए जाने वाले सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की ओर से भारत में वर्ष 2014-16 के बीच मातृ मृत्यु दर की स्थिति पर जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार राजस्थान में अब प्रति एक लाख जीवित जन्म पर माताओं की 199 मृत्यु दर है।
इन राज्यों ने किया बेहतर सुधार
सुधार की दृष्टि से राजस्थान भारी सुधार वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल किया गया है। इनमेें बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और आसाम शामिल है। सूची के अनुसार केरल 46 मातृ मृत्यु दर के साथ देश में सबसे अच्छी स्थिति में है।
मध्यप्रदेश में 48 अंकों की गिरावट
मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर में 48 अंकों की गिरावट दर्ज की गई है। प्रदेश में मातृ मृत्यु दर 2011-13 में 221 थी जाे 2014-16 में घटकर 173 रह गई है। एमपी में पिछले 3 साल में मातृ मृत्यु दर में 22 फीसदी की गिरावट आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक देश के 16 राज्यों का एमएमआर का ब्यौरा दिया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मिशन संचालक एस विश्वनाथन ने बताया कि प्रसव या गर्भपात के 42 दिन के अंदर यदि मृत्यु होती है तो वह मातृ मृत्यु कहलाती है।