
जग्गो सिंह धाकड़
जयपुर। देश में मानसून की कमजोर चाल और अल-नीनो का असर सिर्फ बारिश और खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। बांधों में पानी घटने से जलविद्युत परियोजनाओं के टरबाइन की रफ्तार थमी है। अप्रेल से जुलाई के बीच ही देश में बड़े जलविद्युत संयंत्रों का उत्पादन पिछले साल की तुलना में 10.75 फीसदी गिर गया था, जिसमें सुधार नहीं हुआ है। राजस्थान भी मौसम की मार से अछूता नहीं रहा है।
बांसवाड़ा का माही जलविद्युत गृह पानी के इंतजार में है, यहां विद्युत उत्पादन नहीं हो रहा है। जबकि राणा प्रताप सागर और जवाहर सागर पूरी क्षमता से बिजली नहीं बना पा रहे। पानी से बिजली बनाना सबसे सस्ता पड़ता है। एक यूनिट के उत्पादन पर औसत 30 पैसे ही लागत आती है। बांसवाड़ा स्थित माही जलविद्युत गृह में पिछले वर्ष अगस्त माह में सभी यूनिट में विद्युत उत्पादन हो रहा था और इस बार बांध में पानी नहीं होने के कारण विद्युत उत्पादन बंद है।
जब बिजली की मांग ज्यादा बढ़ती है तो कुछ घंटों के लिए संयंत्र चलाया जाता है। यहां दोनों चरणों के प्लांट की क्षमता 140 मेगावाट है। वित्त वर्ष 2025-26 में 40.456 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन हुआ। चालू वित्त वर्ष में अगस्त माह तक करीब 7.808 मिलियन यूनिट ही उत्पादन हुआ है। जिसमें माही फेज-1 से 4.830 मिलियन यूनिट और माही पेज-2 से 2.978 मिलियन यूनिट उत्पादन शामिल है।
राणाप्रताप सागर में हर रोज 8 से 10 यूनिट बिजली उत्पादन हो रहा है। यहां 172 मेगावाट की क्षमता संयंत्र है, जो रोज 40 लाख यूनिट उत्पादन कर सकता है। इस बार बारिश कम हुई है तो फसलों के लिए पानी छोड़ा जा रहा है। ऐसे में चार यूनिट में से 1 यूनिट ही चल रही है।
जवाहर सागर पर औसत रोज 5 लाख यूनिट उत्पादन हो रहा है। पानी की आवक कम होने के कारण 30 प्रतिशत ही उत्पादन हो रहा है। यहां 99 मेगावाट उत्पादन क्षमता है। अधिशासी अभियंता राजेश गुप्ता ने बताया कि बांध में पानी की आवक कम होने वे विद्युत उत्पादन पर असर पड़ा है।
अप्रेल से 30 जुलाई 2026 के बीच देश में बड़े जलविद्युत संयंत्रों से 54,019.42 मिलियन यूनिट मिलियन यूनिट बिजली पैदा हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में उत्पादन 60,522.95 मिलियन यूनिट था। इस अवधि में उत्पादन में करीब 6,503.53 मिलियन यूनिट की कमी आई है।
जलाशयों की स्थिति में क्षेत्रवार बड़ा अंतर दिखाई देता है। दक्षिणी क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जहां ऊर्जा क्षमता में 63 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। तेलंगाना के नागार्जुन सागर की ऊर्जा क्षमता में 86 फीसदी, आंध्रप्रदेश के श्रीशैलम में 86 फीसदी और केरल के इडुक्की में 57 फीसदी की कमी दर्ज हुई। वहीं पश्चिमी क्षेत्र में ऊर्जा भंडारण 31 फीसदी कम हुआ है। यहां इंदिरा सागर जलाशय की स्थिति खास तौर पर चिंताजनक रही, जहां ऊर्जा उत्पादन में करीब 70 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।