
Rajasthan : प्रदेश के 309 नगरीय निकायों के चुनाव पूरे होने के साथ अब मुकाबला वोट से नतीजों और नतीजों से सियासी संदेश तक पहुंच गया है। यह चुनाव सिर्फ बोर्ड बनाने की लड़ाई नहीं, बल्कि भाजपा सरकार के पौने तीन साल के कामकाज की शहरी क्षेत्रों में स्वीकार्यता और कांग्रेस की विपक्ष के रूप में पकड़ का बड़ा परीक्षण है। 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद नगर का नगर परिषद नतीजे यह संकेत देंगे कि 2028 की विधानसभा के लिए शहरी वोट बैंक किस दिशा में जा रहा है।
भाजपा ने चुनाव को स्थानीय मुद्दों तक सीमित रखने के बजाय सरकार की उपलब्धियों की सक्रियता के सहारे व्यापक राजनीतिक मुकाबले में बदला। 309 निकायों में प्रदर्शन मजबूत रहा तो भाजपा इसे सरकार की स्वीकार्यता और 2028 की राह में शहरी आधार मजबूत होने के संकेत के रूप में पेश करेगी। कमजोर प्रदर्शन रहा तो स्थानीय असंतोष की बहस को कम करने के लिए राजस्थान सरकार को और मजबूती के साथ काम करना होगा।
कांग्रेस के लिए यह चुनाव केवल भाजपा को रोकने का नहीं, बल्कि यह साबित करने का मौका है कि वह शहरी क्षेत्रों में फिर से राजनीतिक जमीन बना रही है।
पहले चरण में 76.42 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि दूसरे चरण में 70.68 प्रतिशत रहा। अंतिम आंकड़ों में कुछ बदलाव संभव है। दोनों चरणों का अंतर यह संकेत देता है कि शहरी क्षेत्रों में मतदाता व्यवहार एक जैसा नहीं रहा। दोनों दल इसे अपने पक्ष में बता रहे हैं।
वागड़ में बीएपी, मत्स्य क्षेत्र में बसपा, मारवाड़ में आरएलपी, शेखावाटी में माकपा और कुछ इलाकों में आम आदमी पार्टी की मौजूदगी भाजपा-कांग्रेस के सीधे मुकाबले में कई जगह समीकरण बिगाड़ेंगी। वहीं कुछ निकायों में मामूली वोट अंतर से बोर्ड का गणित बदल सकता है।