
जयपुर/नरैना। सड़क निर्माण में अधिकतर जगहों पर ना तो गुणवत्तापूर्ण कार्य हो रहे और ना ही मापदंडों का उपयोग किया जा रहा। राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में सड़क निर्माण भगवान भरोसे होता है। मॉनिटरिंग व मिलीभगत के खेल में कुछ ही महीनों में करोड़ों की लागत से बनने वाली सड़कें दम तोड़ देती हैं और लोगों के हिस्से में आते हैं हिचकोले।
ऐसा ही हाल है दूदू-नरैना स्टेट हाईवे-2 की सड़क का। जानकारी के अनुसार नरैना से दूदू की दूरी महज 13 किलोमीटर है लेकिन इस 13 किलोमीटर की सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हो चुके हैं। डामर की सड़क धूल, मिट्टी और कंकरीट में तब्दील हो चुकी है।
सड़क पर दिन-रात धूल का गुबार छाया रहता है। यही नहीं वाहन चालकों को 13 किलोमीटर की दूरी हिचकोले खाते करीब पौन घंटे में तय करनी पड़ रही है। सड़क निर्माण और मरमत के लिए लोगों ने संबंधित विभाग के मंत्री, विधायक, सांसद और अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया लेकिन समस्या जस की तस हुई है।
सड़क निर्माण कार्य शुरू करने के लिए दूदू के युवाओं ने पोस्टकार्ड अभियान शुरू किया था। युवाओं ने उपमुयमंत्री व दीया कुमारी को 1000 पोस्टकार्ड भेजे थे लेकिन शायद यह अभियान डाकघर तक पहुंचकर ही रह गया। नरैना भाजपा मंडल अध्यक्ष भंवर माली, जीएसएस अध्यक्ष हृदय सुमन पारीक, राकेश सोडाणी, रूपचंद लाटा, रतन गंगवाल और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नाथूलाल टांक, रामेश्वर दास स्वामी ने सड़कों को शीघ्र दुरुस्त करवाने की मांग की है।
नरैना से सावरदा स्टेट हाईवे-2 की सड़क का निर्माण 2 वर्ष पूर्व कांग्रेस सरकार में 17 करोड़ की लागत से हुआ था लेकिन यह सड़क मात्र 117 दिन में ही दम तोड़ चुकी है। गारंटी अवधि में होने के बावजूद भी सड़क की मरम्मत नहीं की जा रही।
इसके लिए स्थानीय ग्रामीणों व युवाओं ने कई बार मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को अवगत कराया लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे ग्रामीणों में रोष है। सड़क निर्माण के लिए उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा, दीया कुमारी और कलक्टर जितेंद्र कुमार सोनी को कई बार अवगत करवाने के बावजूद सुध नहीं ली जा रही।
नरैना धार्मिक नगरी है जहां दादू दयाल महाराज का मंदिर और दादू पीठ है वहीं जैन अतिशय क्षेत्र मंदिर, राजर्षि रणसी महाराज का मंदिर, गुरु गोबिंद सिंह, गुरु चरण कमल साहिब गुरुद्वारा जैसे स्थल हैं। इसके अलावा सांभर में देवयानी सरोवर और शाकंभरी माता मंदिर को जाने वाले श्रद्धालु भी इसी सड़क से गुजरते हैं। इधर, नरैना से सांभर-फुलेरा की सड़क भी जर्जर हो चुकी है।