जयपुर

Rajasthan Nikay Election Result 2026: भाजपा-कांग्रेस के बीच वोट का फासला 1% से भी कम, 5 नगर निगम समेत 145 निकायों में बहुमत का पेंच

Rajasthan Municipal Election Result 2026: राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव परिणामों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों की चिंता बढ़ा दी है। 'एक राज्य-एक चुनाव' की दिशा में हुए इन चुनावों को 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले शहरों के राजनीतिक मिजाज की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा था।
2 min read
Sep 15, 2026
Congress V/S BJP
Congress V/S BJP

जयपुर। राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव परिणामों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों की चिंता बढ़ा दी है। 'एक राज्य-एक चुनाव' की दिशा में हुए इन चुनावों को 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले शहरों के राजनीतिक मिजाज की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा था। नतीजों में भाजपा सबसे आगे रही, लेकिन कांग्रेस से उसका वोट प्रतिशत का अंतर महज 0.94% रहा। निकाय चुनाव में भाजपा को 35.30 फीसदी वोट मिले, जबकि कांग्रेस का वोट शेयर 34.36% रहा। दोनों दलों के बीच अंतर सिर्फ 0.94% है।

निर्दलीयों को 27.47% वोट मिले। क्षेत्रीय और छोटे दलों में आरएलपी को 0.95, आप को 0.47, माकपा को 0.32, बसपा को 0.29 और आदिवासी पार्टी 'बाप' को 0.13 फीसदी वोट मिले। इस लिहाज से भाजपा की बढ़त सीटों में ज्यादा है, लेकिन वोट प्रतिशत में कांग्रेस उसके बेहद करीब रही। सबसे बड़ा राजनीतिक पेंच यह है कि 309 में 145 नगरीय निकायों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। ऐसे में निर्दलीय प्रत्याशी बोर्ड बनाने के लिए दोनों प्रमुख दलों के लिए निर्णायक हो गए हैं।

भाजपा का 85 निकायों में बहुमत, कांग्रेस 45 में

भाजपा ने 85 और कांग्रेस ने 45 निकायों में स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। निर्दलीय व अन्य दलों ने 34 निकायों में बहुमत का आंकड़ा पार किया। इस तरह 164 निकायों में तस्वीर साफ है, जबकि शेष 145 निकायों में बोर्ड गठन के लिए जोड़-तोड़ का दौर शुरू हो गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इन निकायों में अपने-अपने प्रत्याशियों के साथ-साथ मजबूत निर्दलीयों से संपर्क तेज कर दिया है।

बोर्ड बनाने के लिए दूसरों के भरोसे

10 नगर निगमों में भाजपा ने जयपुर, कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा में स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि बीकानेर में कांग्रेस बहुमत में रही। शेष पांच निगम भरतपुर, पाली, अलवर, अजमेर और जोधपुर में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। जोधपुर में भाजपा और कांग्रेस दोनों के 44-44 पार्षद हैं, ऐसे में निर्दलीयों की भूमिका निर्णायक है। भरतपुर में भी निर्दलीय महत्वपूर्ण स्थिति में हैं। अलवर मे भाजपा आगे है, लेकिन बहुमत से दूर है। अजमेर और पाली में कांग्रेस आगे रहने के बावजूद बोड बनाने के लिए उसे समर्थन जुटाना होगा।

18 परिषद-122 पालिकाओं में अड़चन

नगर निगमों के अलावा 18 नगर परिषद और 122 नगर पालिकाएं ऐसी हैं, जहां भाजपा या कांग्रेस बहुमत से दूर हैं। यानी सत्ता की चाबी केवल बड़े शहरों में ही निर्दलीयों के हाथ नहीं है, बल्कि छोटे और मध्यम शहरों में भी बोर्ड गठन का फैसला समर्थन जुटाने पर निर्भर करेगा। यही स्थिति दोनों दलों के लिए निकाय परिणामों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना रही है। 2028 से पहले यह भी देखना होगा कि निर्दलीयों को साधने में कौन सा दल कितना सफल रहता है।