
महिपाल सिंह मकराना। फोटो: सोशल
जयपुर। राजस्थान के नगर निकाय चुनावों में 2245 निर्दलीय पार्षदों की जीत को सवर्ण समाज और मूल ओबीसी की जातियों में व्याप्त असंतोष का संकेत बताया है। श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में निर्दलीयों की जीत जनता के बदलते माहौल को दर्शाती है।
मकराना ने कहा कि मुख्यमंत्री अपने गृह क्षेत्र को नहीं बचा पाए, पूर्व मुख्यमंत्री अपने गृह क्षेत्र को नहीं बचा पाए। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत भी अपने गृह क्षेत्र में राजनीतिक पकड़ नहीं बचा पाए। सादुलशहर में 25 में से 22, पिलानी में 35 में से 30 और भरतपुर नगर परिषद में 65 में से 36 सीटों पर निर्दलीय जीते।
मकराना में 36 निर्दलीय, 18 कांग्रेस और 6 भाजपा प्रत्याशी विजयी रहे। जयपुर नगर निगम में भी 14 निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत का उन्होंने उल्लेख किया। महिपाल सिंह मकराना ने कहा कि यूजीसी के मुद्दे पर सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर रोलबैक नहीं किया तो सवर्ण समाज और मूल ओबीसी की जातियों के साथ मिलकर आगामी पंचायती राज चुनावों में इससे बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया जाएगा।
राजस्थान के शहरी निकायों के चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के बीच केवल 99615 वोटों का अंतर रहा है। भाजपा को कांग्रेस से 99615 वोट ज्यादा मिले हैं। कुल 1.06 करोड़ वोटों में से भाजपा को 37.35 लाख, कांग्रेस को 36.35 लाख और निर्दलीयों को 29.06 लाख वोट मिले हैं। पांच अन्य पार्टियों को नोटा से कम वोट मिले हैं। नोटा को 1.09 लाख वोट मिले हैं। वहीं, आरएलपी को 1 लाख 277 वोट, आम आदमी पार्टी (आप) को 49829, बीएपी को 14150, सीपीएम को 34,170 और बसपा को 30179 वोट मिले हैं।
जयपुर नगर निगम में भाजपा ने बहुमत हासिल कर वार्ड संख्या की गिनती में कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया, लेकिन कांग्रेस वोट पाने में भाजपा से आगे निकल गई। इसके विपरीत मतदान प्रतिशत में आगे रही डीग जिले की पहाड़ी नगरपालिका में कांग्रेस को केवल एक वोट मिल पाया और नोखा नगरपालिका में कांग्रेस को कोई वोट नहीं मिला।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी आंकडों के अनुसार जयपुर नगर निगम के लिए भाजपा ने 78 वार्डों में जीत दर्ज कर कुल 5 लाख 52 हजार 713 वोट हासिल किए, लेकिन मतों के मामले में कांग्रेस ने भाजपा को पीछे छोड़ दिया। कांग्रेस ने जयपुर नगर निगम क्षेत्र में 5 लाख 65 हजार 848 वोट प्राप्त किए और दोनों दलों के मतों के अंतर से अधिक 27 हजार 99 वोट नोटा के खाते में चले गए।
जोधपुर और भरतपुर जैसे त्रिशंकु निकायों में ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ का दूसरा अध्याय शुरू हो गया है। जोधपुर में भाजपा और कांग्रेस 44-44 सीटों पर बराबरी पर हैं, जबकि भरतपुर में 38 निर्दलीयों की जीत ने मुकाबले को पूरी तरह त्रिकोणीय बना दिया है।
Updated on:
15 Sept 2026 02:27 pm
Published on:
15 Sept 2026 02:27 pm
