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Rajasthan Nikay Chunav Results 2026: किसके पाले में जाएंगे किंगमेकर? बोर्ड की कुर्सी पर सस्पेंस बरकरार

प्रदेश के पांच नगर निगम जोधपुर, अजमेर, भरतपुर, अलवर और पाली में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही निर्दलीय पार्षदों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश में जुट गई हैं।
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जयपुर

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Savita Vyas

Sep 15, 2026

जयपुर के बस्सी में बाड़ाबंदी के दौरान क्रिकेट खेलते कांग्रेस प्रत्याशी patrika photo

जयपुर के बस्सी में बाड़ाबंदी के दौरान क्रिकेट खेलते कांग्रेस प्रत्याशी patrika photo

जयपुर। नगर निकाय चुनाव के नतीजे आने के साथ ही शहरों की सत्ता का अगला खेल शुरू हो गया है। महापौर और बोर्ड बनाने के लिए जहां भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने समीकरण साधने में जुटी हैं, वहीं कई नगर निगमों और परिषदों में निर्दलीय पार्षद अचानक सबसे अहम हो गए हैं। बहुमत के आंकड़े से दूर खड़े दलों के लिए अब एक-एक पार्षद का समर्थन सत्ता की चाबी बन सकता है। प्रदेश के पांच नगर निगम—जोधपुर, अजमेर, भरतपुर, अलवर और पाली में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में इन निगमों में बोर्ड गठन की दिशा निर्दलीय पार्षद तय कर सकते हैं।

चार निगमों में भाजपा की बढ़त, बीकानेर कांग्रेस के साथ

जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा और कोटा नगर निगम में भाजपा ने मेयर बनाने के लिए जरूरी राजनीतिक बढ़त हासिल की है। वहीं बीकानेर में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है। इसके उलट पांच निगमों में बहुमत का गणित उलझा हुआ है। यही वजह है कि दोनों प्रमुख दल अब पार्षदों के संपर्क में हैं और बैठकों का दौर तेज होने लगा है।

पाली-अजमेर में कांग्रेस आगे, लेकिन बहुमत से दूर

पाली और अजमेर में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा हासिल नहीं कर सकी। ऐसे में कांग्रेस को बोर्ड गठन के लिए निर्दलीयों या अन्य पार्षदों का सहारा लेना होगा। भाजपा भी इन निगमों में समीकरण अपने पक्ष में करने की कोशिश में है।

अलवर में भाजपा की बढ़त, जोधपुर में कांटे का गणित

अलवर में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन बहुमत नहीं होने से उसकी राह आसान नहीं है। कांग्रेस भी ऐसे पार्षदों को साथ लाने की कोशिश कर सकती है जो भाजपा के साथ नहीं हैं। जोधपुर में भाजपा-कांग्रेस के बीच बेहद करीबी मुकाबले ने तस्वीर और दिलचस्प बना दी है। यहां एक-एक पार्षद का समर्थन भी पूरा समीकरण बदल सकता है।

भरतपुर में निर्दलीयों की सबसे ज्यादा पूछ

भरतपुर में निर्दलीयों की मजबूत मौजूदगी ने उन्हें सीधे किंगमेकर की स्थिति में ला दिया है। बोर्ड गठन के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों को उनकी जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में समर्थन के बदले पद, समितियों और स्थानीय राजनीतिक प्रभाव को लेकर सौदेबाजी के कयास भी तेज हैं।