
राजस्थान के शहरी इलाकों में हाल ही में संपन्न हुए नगर निकाय चुनावों की हलचल थमने के बाद अब ग्रामीण अंचलों यानी गांवों और ढाणियों में पंचायती राज चुनावों को लेकर राजनीतिक पारा गरमाने लगा है। शहरों के बाद अब सभी की निगाहें ग्रामीण क्षेत्रों के चुनावों पर टिकी हैं, लेकिन प्रशासनिक व्यस्तता के चलते पंचायत चुनाव का शुरुआती शेड्यूल थोड़ा सा पटरी से उतर गया है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पूर्व में उच्च न्यायालय में पेश किए गए शपथ पत्र और प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक चुनावों की औपचारिक घोषणा 23 सितंबर को होनी थी, लेकिन पंचायती राज संस्थाओं के लिए सीटों के आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया समय पर पूरी न होने के कारण आयोग तय वक्त पर चुनावी घोषणा नहीं कर पाया। ऐसे में अब हाईकोर्ट में प्रस्तुत किए गए पुराने चुनाव शेड्यूल में बदलाव होना पूरी तरह तय माना जा रहा है।
इस पूरे प्रशासनिक विलंब की मुख्य वजह यह रही कि सितंबर महीने के मध्य में राज्य का पूरा प्रशासनिक अमला, जिसमें जिला कलेक्टर, उपखंड अधिकारी (SDM) और अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं, नगरीय निकाय चुनावों के महापौर, अध्यक्ष और पार्षदों के पदों की चुनाव प्रक्रिया में पूरी तरह व्यस्त था। इस कारण ग्रामीण क्षेत्रों के वार्डों और सीटों के लिए होने वाली आरक्षण लॉटरी निर्धारित तिथियों पर नहीं निकाली जा सकी।
हालांकि, राजस्थान हाईकोर्ट का यह कड़ा निर्देश पहले से ही तय है कि राज्य में पंचायती राज संस्थाओं यानी सरपंच, पंचायत समिति सदस्यों और जिला परिषद के चुनाव हर हाल में 15 नवंबर 2026 की समय-सीमा से पहले पूरे कर लिए जाने चाहिए। इसी डेडलाइन को ध्यान में रखते हुए अब निर्वाचन आयोग नए सिरे से अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है।
राज्य सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि वे राज्य में पंचायती राज और नगरीय निकाय (शहरी स्थानीय निकाय) दोनों के चुनावों को हर हाल में 15 नवंबर 2026 तक पूरी तरह संपन्न करा लेंगे। हाईकोर्ट ने इस तारीख को अंतिम समय-सीमा के रूप में रिकॉर्ड पर लिया और साफ कर दिया कि इसके बाद कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।
सरकार द्वारा कोर्ट में रखे गए चुनावी रोडमैप के अनुसार निम्नलिखित संभावित तारीखें तय की गई थीं:
नगरीय निकाय चुनाव : इसके लिए 17 अगस्त को अधिसूचना और 20 सितंबर 2026 तक मतदान संपन्न कराना प्रस्तावित था।
पंचायत चुनाव घोषणा: पंचायत चुनावों की औपचारिक घोषणा और प्रक्रिया की शुरुआत के लिए 23 सितंबर 2026 की तारीख तय थी।
पंचायत चुनाव अधिसूचना: आधिकारिक अधिसूचना जारी करने की संभावित तारीख 28 सितंबर 2026 रखी गई थी।
चरणबद्ध मतदान: पंच और सरपंच पद के चुनाव के लिए 14, 24, 30 अक्टूबर और 4 नवंबर 2026 को चरणबद्ध तरीके से मतदान और मतगणना का रोडमैप था।
अंतिम चरण (प्रधान/प्रमुख चुनाव): 14 नवंबर को प्रधान/जिला प्रमुख और 15 नवंबर 2026 को उपप्रधान/उपप्रमुख के चुनाव के साथ पूरी प्रक्रिया समाप्त होनी थी।
नगरीय निकाय चुनावों की व्यस्तता और ओबीसी (OBC) आरक्षण रिपोर्ट के बाद सीटों के निर्धारण की लॉटरी प्रक्रिया में देरी (जो आखिरकार 23 और 24 सितंबर को पूरी हो पाई) के कारण 23 सितंबर वाला यह शुरुआती शेड्यूल लागू नहीं हो सका।
चूंकि आधारभूत आरक्षण लॉटरी अब पूरी हो चुकी है, इसलिए राज्य निर्वाचन आयोग 15 नवंबर की अंतिम डेडलाइन को ध्यान में रखते हुए 30 सितंबर या अक्टूबर के पहले सप्ताह में नया आधिकारिक चुनावी कार्यक्रम और आचार संहिता लागू करने की अंतिम तैयारी कर रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर देरी की भरपाई करते हुए पंचायती राज विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिलाओं के लिए सीटों के निर्धारण की आरक्षण लॉटरी प्रक्रिया को लगभग पूरा कर लिया है। जिला स्तर और उपखंड स्तर पर विभिन्न चरणों में वार्डों के आरक्षण की तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो चुकी है।
राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त राजेश्वर सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि पंचायती राज विभाग से आरक्षण लॉटरी की पूरी और संकलित सूचना मिलने के बाद ही चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। आयोग इस समय सभी संबंधित विभागों और जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ लगातार मैराथन बैठकें और विचार-विमर्श कर रहा है ताकि एक व्यावहारिक और चरणबद्ध चुनावी कार्यक्रम तैयार किया जा सके। इस पूरी रूपरेखा में इस बात का विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि बीच में आने वाले प्रमुख पर्व और त्योहारों के दौरान मतदान या अन्य चुनावी गतिविधियां प्रभावित न हों।
शेड्यूल में बदलाव और तारीखों के आगे खिसकने की चर्चाओं के बीच सोशल मीडिया पर कई तरह की भ्रामक और काल्पनिक चुनाव तारीखें तैर रही हैं, जिससे संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति बन गई है।
इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार किसी भी तरह की सोशल मीडिया अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। आयोग बहुत जल्द पूरी पारदर्शिता के साथ आधिकारिक पंचायत चुनाव कार्यक्रम और आचार संहिता की घोषणा करेगा। चूंकि ग्रामीण चुनाव कराने के लिए प्रशासनिक अमले को भी जरूरी समय और प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, इसलिए हर कदम फूंक-फूंक कर रखा जा रहा है। आरक्षण की स्थिति साफ होने के बाद अब गांवों की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है और हर कोई आधिकारिक तारीखों के ऐलान का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।