राजस्थान में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर हलचलें तेज़ हो गई हैं। जहां चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता एवं प्रतिनिधि अपनी-अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं, वहीं इन चुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरह से संपन्न करवाने के लिए राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग भी अपनी तैयारियों में जुटा हुआ है।
राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश में आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर अपनी कमर कस ली है। जयपुर के इंदिरा गांधी पंचायती राज भवन में 5 से 7 फरवरी 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर (DLMT) प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। आयोग के आयुक्त राजेश्वर सिंह ने स्पष्ट किया कि इस बार का मुख्य फोकस 'त्रुटिरहित मतदान' और 'पारदर्शी मतगणना' पर है।
राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि इस प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य जिला स्तर पर एक ऐसा मजबूत ढांचा तैयार करना है, जो स्थानीय स्तर पर चुनाव कर्मियों को गुणवत्तापूर्ण ट्रेनिंग दे सके।
इस कार्यक्रम में प्रदेश के सभी 41 जिलों से प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रत्येक जिले से 5 विशेषज्ञ मास्टर ट्रेनर्स को बुलाया गया था, जिससे कुल 205 ट्रेनर्स की टीम तैयार हुई है। ये ट्रेनर्स अब अपने-अपने जिलों में जाकर हजारों की संख्या में मतदान अधिकारियों (PO) और प्रथम मतदान अधिकारियों (PRO) को प्रशिक्षित करेंगे।
आयोग के सचिव राजेश वर्मा ने प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में मास्टर ट्रेनर्स को संबोधित करते हुए कहा कि पंचायती राज चुनाव सीधे तौर पर जनता से जुड़े होते हैं, इसलिए यहाँ संवेदनशीलता और सावधानी की आवश्यकता अधिक है।
उन्होंने जोर दिया कि चुनाव प्रक्रिया में रत्ती भर भी चूक स्वीकार्य नहीं होगी। मतदाताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी भी इन ट्रेनर्स की होगी। चुनाव आचार संहिता का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
सह सचिव नीरज शर्मा और उप सचिव मनीषा चौधरी ने प्रशिक्षण की बारीकियों पर प्रकाश डाला। मास्टर ट्रेनर्स को तकनीकी पहलुओं पर "हैंड्स-ऑन" ट्रेनिंग दी गई।
मतदान प्रक्रिया: मतदान केंद्रों का प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल।
EVM और बैलेट पेपर: इस बार के चुनाव में इस्तेमाल होने वाली वोटिंग तकनीक का गहन अभ्यास।
आचार संहिता: चुनावी अपराधों और आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन पर कार्रवाई।
मतगणना: मतगणना के दौरान होने वाली संभावित तकनीकी समस्याओं का समाधान।
उप सचिव अंबालाल ने बताया कि प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स की जिम्मेदारी केवल क्लासरूम तक सीमित नहीं होगी। उन्हें जिलों में जाकर मतदान केंद्रों का भौतिक निरीक्षण करना होगा। वे सुनिश्चित करेंगे कि क्या बूथों पर दिव्यांगों के लिए रैंप, बिजली, पानी और इंटरनेट जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं।
प्रशिक्षण को सफल बनाने में राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर मनीष कुमार गोयल, मनीष माथुर और राजेश सोनोनिया ने मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने वास्तविक चुनावी परिस्थितियों के 'सिमुलेशन' (Mock Drill) के जरिए ट्रेनर्स की शंकाओं का समाधान किया। सभी 205 प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर उन्हें उनके जिलों के लिए रवाना किया गया।